Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    उत्तराखंड में जल रहे जंगल… और वन अफसर कर रहे जनगणना,  एनजीटी ने सरकार से मांगा जवाब

    Updated: Fri, 22 May 2026 11:22 AM (IST)

    उत्तराखंड में भीषण जंगल की आग के बीच वन अधिकारियों को जनगणना ड्यूटी पर लगाए जाने पर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    अंकुर अग्रवाल, देहरादून। एक तरफ उत्तराखंड के जंगल भीषण गर्मी में धधक रहे हैं, आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, पहाड़ों में पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है… और दूसरी तरफ वन विभाग के अधिकारियों को जनगणना ड्यूटी में झोंक दिया गया।

    अब इस गंभीर मसले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने तीखा रुख अपनाया है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने उत्तराखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हाफ) से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वन अधिकारियों को गैर-वन कार्यों में क्यों लगाया गया?

    अगली सुनवाई 26 मई को

    मामले में अगली सुनवाई 26 मई को वन अधिकारियों की तैनाती संबंधी मुद्दे पर होगी, जबकि अन्य पहलुओं पर सुनवाई आठ जुलाई को तय की गई है। एनजीटी ने दीपिका खारी बनाम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एवं अन्य से जुड़े मामले में सुनवाई के बाद यह कार्रवाई की है।

    शुरुआत ऋषिकेश-देहरादून मार्ग स्थित बड़कोट वन रेंज में सूखी पत्तियां जलाने से हुए पर्यावरणीय नुकसान से हुई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान मामला वन विभाग की कार्यप्रणाली व संसाधनों की तैनाती तक पहुंच गया।

    शिकायतकर्ता के अधिवक्ता गौरव बंसल ने एनजीटी को बताया कि 25 मार्च को जारी राज्य सरकार के आदेश के तहत वन अधिकारियों को जनगणना कार्य में लगाया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 15 मई 2024 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया था कि वन कर्मियों व वन विभाग के वाहनों का इस्तेमाल चुनाव, चारधाम यात्रा या अन्य गैर-वन गतिविधियों में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे जंगलों की सुरक्षा प आग नियंत्रण प्रभावित होता है।

    खबरें और भी

    एनजीटी ने सीधे मांगा जवाब

    एनजीटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य डा. ए. सेंथिल वेल व डा. अफरोज अहमद की पीठ ने पीसीसीएफ (हाफ) देहरादून को निर्देश दिए हैं कि वह विस्तृत जवाब दाखिल करें और बताएं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद वन अधिकारियों की तैनाती जनगणना जैसे कार्यों में क्यों की गई। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभाग अगली सुनवाई से कम से कम तीन दिन पहले विस्तृत जवाब दाखिल करें।

    उत्तराखंड के लिए बड़ा सवाल

    उत्तराखंड में हर साल गर्मियों में जंगलों में आग की घटनाएं भयावह रूप लेती हैं। हजारों हेक्टेयर वन संपदा राख हो जाती है, वन्यजीव प्रभावित होते हैं और पहाड़ों का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है। ऐसे समय में यदि वन विभाग का मैदानी अमला ही दूसरी ड्यूटी में लगा दिया जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि जंगलों की निगरानी आखिर कौन करेगा? एनजीटी की सख्ती ने अब सरकार और वन विभाग दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

    यह भी पढ़ें- गर्मी बढ़ने से उत्तराखंड के जंगलों में आग का तांडव, दो लोगों की झुलसकर मौत से हाहाकार

    यह भी पढ़ें- बांसवाड़ा के जंगलों में आग से तबाही, सैकड़ों पेड़-पौधे जले

    यह भी पढ़ें- उत्तरकाशी के जंगलों में आग से फैल रही धुंध, जन जीवन प्रभावित, गंगा-यमुना घाटियों तक बढ़ा दायरा