Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    देहरादून: प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य और पद्मश्री से सम्मानित वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन, हृदय गति रुकने से हुई मौत

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 08:07 AM (IST)

    प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य और पद्मश्री से सम्मानित वैद्य बालेंदु प्रकाश का 67 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे पूर्व राष्ट्रपति केआर नार ...और पढ़ें

    वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन।

    वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन।

    HighLights

    1. पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का 67 वर्ष की आयु में निधन।

    2. पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के निजी चिकित्सक रहे।

    3. आयुर्वेद को वैज्ञानिक शोध से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान।

    जागरण संवाददाता, देहरादून। देश के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य, पद्मश्री सम्मानित व पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के निजी चिकित्सक रहे 67 वर्षीय वैद्य बालेंदु प्रकाश का शुक्रवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। शुक्रवार को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। उनके निधन से आयुर्वेद चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

    वैद्य बालेंदु प्रकाश पिछले कुछ वर्षों से रुद्रपुर में रह रहे थे। यहां उन्होंने पादाव स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर की स्थापना कर आयुर्वेद चिकित्सा और शोध को नई दिशा दी। उनकी पुत्री वैद्य शिखा प्रकाश ने बताया कि बीते कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य लगातार खराब था। रस शास्त्र के विशेषज्ञ वैद्य बालेंदु प्रकाश ने पारंपरिक आयुर्वेद को वैज्ञानिक प्रमाणों और आधुनिक शोध से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है। आयुर्वेद में उनके विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1999 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

    कैंसर और अग्न्याशय (पैंक्रियास) से जुड़े रोगों के आयुर्वेदिक उपचार पर उनके शोध को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और सीएसआइआर संस्थानों के साथ मिलकर कई शोध परियोजनाओं पर काम किया। आयुर्वेदिक भस्म और अन्य पारंपरिक औषधियों के वैज्ञानिक अध्ययन तथा उनके चिकित्सकीय उपयोग को प्रमाणित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    साक्ष्य आधारित आयुर्वेद के थे मजबूत पैरोकार

    वैद्य बालेंदु प्रकाश को एविडेंस बेस्ड आयुर्वेद (साक्ष्य आधारित आयुर्वेद) का प्रमुख समर्थक माना जाता था। उन्होंने वर्षों के शोध और अनुभव के आधार पर कई मानकीकृत उपचार पद्धतियां विकसित कीं। उनके शोधपत्रों, पुस्तकों और चिकित्सा कार्यों ने आयुर्वेद को नई विश्वसनीयता दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    खबरें और भी

    उनके निधन पर आयुर्वेद चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। चिकित्सा जगत ने इसे आयुर्वेद की अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि वैद्य बालेंदु प्रकाश का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

    यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में जारी रहेगा बारिश का सिलसिला: रुद्रप्रयाग-चमोली, टिहरी और बागेश्वर में यलो अलर्ट जारी