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    चारधाम यात्रा में करें पंचकेदार के सभी स्वरूपों के दर्शन, बिना लंबी पैदल यात्रा के मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव

    Updated: Fri, 15 May 2026 07:22 PM (IST)

    चारधाम यात्रा के दौरान बाबा केदार के पांच स्वरूपों (पंच केदार) के दर्शन आसानी से किए जा सकते हैं, जिसमें ओंकारेश्वर, मर्कटेश्वर, गोपीनाथ और कल्पेश्वर ...और पढ़ें

    गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर। वहीं, खूबसूरत मक्कूमठ गांव। उधर, पंचम केदार कल्पेश्वर धाम।

     गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर। वहीं, खूबसूरत मक्कूमठ गांव। उधर, पंचम केदार कल्पेश्वर धाम।

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    संक्षेप में पढ़ें

    दिनेश कुकरेती, देहरादून। चारधाम यात्रा के दौरान आप बाबा केदार के सभी पांच स्वरूपों (पंच केदार) के दर्शन भी कर सकते हैं और वह भी शीत केदार समूह के मंदिरों में। इन धामों तक पहुंचने की राह बेहद आसान है। न तो आपको कई-कई किमी का दूरी पैदल नापनी पड़ेगी, न लंबी-लंबी लाइनों में लगने की ही जरूरत है।

    सभी शीत केदार मंदिरों (ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ, मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ और गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर) तक ऋषिकेश से निजी व सार्वजनिक वाहन सुविधा उपलब्ध है।

    इसके अलावा पंचम केदार कल्पेश्वर धाम पहुंचने के लिए भी महज एक किमी पैदल चलना पड़ता है। इस यात्रा के दौरान आप प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चोपता, खूबसूरत उर्गम घाटी और समृद्ध हिमालयी जैव विविधता के भी दर्शन कर सकते हैं।

    Omkareshwar Temple Ukhimath Uttarakhand

    ओंकारेश्वर धाम : यहां विराजते हैं पंचकेदार

    रुद्रप्रयाग जिले में ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर बाबा केदार ही नहीं, द्वितीय केदार बाबा मध्यमेश्वर का भी शीतकालीन गद्दीस्थल है। यहां पांचों केदार पिंडी रूप में विराजमान हैं, इसलिए मंदिर की ख्याति पंचगद्दी स्थल के रूप में भी है।

    यहां की सुरम्य वादियां, ठीक सामने नजर आने वाली चौखंभा की हिमाच्छादित चोटियां और बांज-बुरांश के घने जंगल हर किसी का मन मोह लेते हैं। नगर के मध्य में ओंकारेश्वर मंदिर स्थापित है, जिसका निर्माण अतिप्राचीन धारत्तुर परकोटा शैली में हुआ है।

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    मान्यता है कि बाणासुर की बेटी उषा व भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध की शादी इसी स्थान पर हुई थी। इसलिए इस तीर्थ को उषामठ कहा जाने लगा। कालांतर इसका अपभ्रंश ऊखीमठ हो गया।

    Markateswar Dham

    मर्कटेश्वर धाम

    रुद्रप्रयाग जिले में मक्कूमठ गांव स्थित मर्कटेश्वर मंदिर तृतीय केदार बाबा तुंगनाथ का शीतकाल प्रवास है। रुद्रप्रयाग से 44 किमी दूर स्थित पट्टी परकंडी और ऊखीमठ तहसील का यह गांव चारों ओर से देवदार, बांज, बुरांश व थुनेर के घने जंगल से घिरा है।

    Makummath Village

    गांव का इतिहास प्रथम शताब्दी पूर्व से माना जाता है। मर्कटेश्वर मंदिर भी कत्यूरी शैली में बना हुआ है, जिसे गुप्तोत्तरकालीन मंदिर स्थापत्य कहा जाता है। ऊखीमठ से मक्कूमठ पहुंचने के लिए 32 किमी और भीरी से 16 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।

    मक्कूमठ दुर्लभ हिमालयी पक्षी प्रजातियों का घर है और उन लोगों के लिए एक अद्भुत जगह है जो शहर की हलचल से दूर किसी शांतिपूर्ण जगह की तलाश में हैं।

    Gopinath Temple, Gopeshwar

    गोपेश्वर के गोपीनाथ

    चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर में 71 फीट ऊंचा गोपीनाथ मंदिर केदारनाथ मंदिर के बाद उत्तराखंड का दूसरा सबसे ऊंचा मंदिर है। चतुर्थ केदार बाबा रुद्रनाथ के शीतकालीन प्रवास स्थल इस मंदिर में भी भोलेनाथ का अभिषेक सिर्फ बिल्व पत्र से होता है।

    चारधाम यात्रा मार्ग में पड़ने के कारण यहां पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय व धन की जरूरत नहीं पड़ती। नागर शैली में बने गोपीनाथ मंदिर का इतिहास नवीं से 11वीं सदी के मध्य कत्यूरी शासन काल का माना जाता है।

    मंदिर प्रांगण में 12वीं सदी का अष्टधातु निर्मित पांच मीटर लंबा त्रिशूल स्थापित है, जिसके मध्य में एक परशु भी है। त्रिशूल के मध्य फलक पर नाग वंश के शासक गणपति नाग और आधार फलक पर नेपाल के मल्ल राजा अशोक चल्ल का 1191 ईस्वी का प्रशस्ति लेख अंकित है।

    Fifth Kedar Kalpeshwar Dham

    कल्पेश्वर धाम

    चमोली जिले की उर्गम घाटी के देवग्राम में स्थित पंचम केदार कल्पेश्वर धाम पहुंचने के लिए अब एक किमी से भी कम का सफर पैदल तय करना पड़ता है। कल्पेश्वर धाम को कल्पनाथ नाम से भी जाना जाता है। यहां सालभर भगवान शिव के जटा रूप में दर्शन होते हैं।

    कहते हैं कि इस स्थल पर दुर्वासा ऋषि ने कल्प वृक्ष के नीचे घोर तप किया था। तभी से यह स्थान कल्पेश्वर या 'कल्पनाथ' नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर के गर्भगृह का रास्ता एक गुफा से होकर जाता है। धाम के कपाट बारहों महीने खुले रहते हैं।

    Beautiful view of Gopeshwar

    पक्षी विविधता संग आध्यात्मिक शांति की अनुभूति

    यात्रा के दौरान आप हिमालय की गोद में बसे खूबसूरत मक्कूमठ गांव में हिमालय की दुर्लभ एवं लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों का दीदार कर सकते हैं। इसी तरह हरे-भरे बुग्याल और घने जंगलों से घिरा चोपता नंदा देवी व त्रिशूल जैसी हिमालय की चोटियों के मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है।

    उर्गम घाटी का सुंदरता भी सम्मोहित कर देने वाली है। आध्यात्मिक शांति की तलाश हो या प्रकृति की सुंदरता, उर्गम घाटी अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करती है।

    Beautiful view of Chopta

    पहाड़ी किचन में स्थानीय व्यंजनों का आनंद

    इस पूरे यात्रा मार्ग पर होटल व होम स्टे की भरमार है। सभी होम स्टे में पहाड़ी किचन उपलब्ध हैं, जहां आप पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठा सकते हैं।

    हां! यात्रा के दौरान गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां साथ लेकर आना न भूलें। कम से कम दस दिन का यात्रा प्लान बनाकर अवश्य आएं। इससे आप फुर्सत में तीर्थों के दर्शन प्रकृति की खूबसूरती का आनंद उठा सकेंगे।

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