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    गंगोत्री धाम की यात्रा में आस्था के साथ रोमांच भी, रास्ते में देखें प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम

    Updated: Fri, 08 May 2026 07:32 PM (IST)

    गंगोत्री धाम की यात्रा तीर्थाटन के साथ-साथ प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम वाले खूबसूरत पर्यटन स्थलों का दीदार कराती है। दयारा बुग्याल, हर्षिल, नेला ...और पढ़ें

    गंगोत्री धाम के यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले दयारा बुग्याल, हर्षिल, क्यारकोटी ट्रेक, नेलांग घाटी व नचिकेता ताल की सैर आपकी यात्रा को यादगार बना देगी।

    गंगोत्री धाम के यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले दयारा बुग्याल, हर्षिल, क्यारकोटी ट्रेक, नेलांग घाटी व नचिकेता ताल की सैर आपकी यात्रा को यादगार बना देगी।

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    संक्षेप में पढ़ें

    अजय कुमार, उत्तरकाशी। गंगोत्री धाम की यात्रा श्रद्धालुओं को तीर्थाटन के साथ खूबसूरत पर्यटन स्थलों के दीदार का भी अवसर प्रदान करती है। गंगोत्री यात्रा मार्ग पर प्रकृति एवं संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है कि तन-मन तरोताजा और आत्मा तृप्त हो जाए।

    ऐसे में गंगोत्री दर्शन को आने वाले श्रद्धालु इन पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर सकते हैं, जिससे उनकी यात्रा और यादगार बन जाए। ये स्थल हैं दयारा बुग्याल, हर्षिल, क्यारकोटी ट्रेक, नेलांग घाटी व नचिकेता ताल। धाम के कपाट खुलने के साथ ही इन पर्यटन स्थलों पर चहल-पहल बढ़ जाती है।

    Dayara Bugyal

    दयारा बुग्याल

    समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मखमली घास के इस मैदान तक पहुंचने के लिए यात्रा मार्ग पर स्थित भटवाड़ी से रैथल गांव होते हुए करीब आठ किमी की ट्रेकिंग करनी पड़ती है।

    भटवाड़ी से आगे बार्सू गांव जाने वाली सड़क से भी यहां पहुंचने के लिए पैदल ट्रेक है। वन विभाग की निगरानी वाले रैथल-दयारा ट्रेक पर ग्रामीण अपनी छानियों में पर्यटकों को रहने-खाने की सुविधा प्रदान करते हैं।

    दयारा बुग्याल ट्रेक पर सालभर पर्यटकों की चहल-पहल रहती है, लेकिन इस दिनों कुछ और बढ़ जाती है। अगस्त में यहां प्रसिद्ध बटर फेस्टिवल (अंढूड़ी उत्सव) का भी आयोजन होता है।

    Harshil famous tourist destination

    हर्षिल

    गंगोत्री यात्रा मार्ग पर स्थित हर्षिल गांव प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। गंगोत्री धाम से करीब 20 किमी पहले भागीरथी (गंगा) नदी के तट पर स्थित हर्षिल घाटी की प्राकृतिक सुंदरता बरबस पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

    हर्षिल उपला टकनौर क्षेत्र के आठ गांवों में से एक है। इससे लगे गंगा ग्राम बगोरी में जाड़-भोटिया जनजाति के लोग निवास करते हैं, जो अपने पहाड़ी शैली में निर्मित घरों को अब होम स्टे रूप में विकसित कर पर्यटकों को विश्राम की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

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    Kyarkoti Trek

    क्यारकोटी ट्रेक

    समुद्रतल से 11,414 फीट की ऊंचाई पर स्थित हर्षिल-क्यारकोटी ट्रेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है।

    इस ट्रेक की शुरुआत भागीरथी नदी के किनारे बसे हर्षिल गांव से होती है। करीब 16 किमी लंबा यह ट्रेक भोजपत्र व देवदार के घने जंगल और खूबसूरत घाटियों से होता हुआ मखमली घास के मैदान तक पहुंचता है।

    पर्यटक बुग्याल में जब पहुंचते हैं तो हिमालयी फूलों की खुशबू और क्यारकोटी झील के मनोरम दृश्य उनका स्वागत करते हैं।

    Nelang Valley  of Uttarkashi

    नेलांग घाटी

    चीन सीमा से लगी नेलांग घाटी गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में आती है। गंगोत्री धाम से करीब छह किमी पहले नेलांग घाटी के लिए सड़क निकलती है।

    भौगोलिक परिस्थितियों में यह घाटी केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और स्फीति घाटी की अनुभूति कराती है। इसे उत्तराखंड का लद्दाख या छोटा लद्दाख नाम से भी जाना जाता है।

    इनर लाइन क्षेत्र में स्थित होने के कारण नेलांग घाटी भ्रमण के लिए एसडीएम भटवाड़ी के कार्यालय से अनुमति लेना जरूरी होता है।

    Nachiketa Lake

    नचिकेता ताल

    उत्तरकाशी-लंबगांव मार्ग पर चौरंगीखाल नामक स्थान से नचिकेताताल के लिए करीब चार किमी लंबा पैदल ट्रेक शुरू होता है।

    देवदार के घने जंगल के बीच स्थित नचिकेता ताल को ऋषिकुमार नचिकेता की जन्मस्थली भी कहा जाता है। ताल के किनारे नचिकेता का एक मंदिर भी है। मान्यता है कि नचिकेता को यमराज ने इसी ताल के किनारे मृत्यु के रहस्य से परिचित कराया था।

    ऐसे पहुंचे और पहाड़ी रसोई का लें जायका

    आप गंगोत्री यात्रा पर आ रहे हैं तो गर्म कपड़े व जरूरी दवाइयां साथ लाना न भूलें। यहां पहुंचने के लिए देहरादून या ऋषिकेश पहुंचें।

    इसके बाद उक्त सभी स्थानों के लिए ऋषिकेश व देहरादून से सार्वजनिक व निजी वाहनों की सुविधा उपलब्ध है। पूरे यात्रा मार्ग और पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त संख्या में होटल व होम स्टे उपलब्ध हैं।

    होम स्टे में आप पहाड़ी रसोई का स्वाद भी ले सकते हैं। यहां आपको न केवल पहाड़ के पारंपरिक घरों में रहने की अनुभूति होगी, बल्कि लोक संस्कृति से रूबरू होने का अवसर भी मिलेगा।

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