उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं में उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ा, लेकिन छात्र संख्या घटी
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं में उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ने के बावजूद सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे शिक्षा व्यवस् ...और पढ़ें

बोर्ड परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता हासिल कर खुशी मनाती नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास की छात्राएं व स्टाफ। जागरण

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड के ताजा परीक्षा परिणामों में जहां हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ा है, वहीं सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या में गिरावट का सिलसिला चिंता का विषय बना हुआ है।
वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर 6,769 छात्रों की कमी दर्ज की गई है।
इस वर्ष हाईस्कूल का पास प्रतिशत पिछले वर्ष की तुलना में 1.33 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का 1.88 प्रतिशत बढ़ा है। परिणामों में सुधार को लेकर अधिकारी संतोष जता रहे हैं, लेकिन नामांकन घटने से सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश में सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का शिक्षा बजट और 27 हजार से ज्यादा शिक्षक होने के बावजूद छात्र सरकारी स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। हर वर्ष अप्रैल में प्रवेशोत्सव के माध्यम से नामांकन बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित ही नजर आ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में 876 छात्रों की कमी आई है, जबकि इंटरमीडिएट में यह गिरावट और अधिक 5,893 छात्रों तक पहुंच गई है। प्राथमिक स्तर पर भी स्थिति गंभीर है।
छात्र संख्या शून्य होने के कारण पहले ही 826 प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा चुके हैं। शिक्षा की गुणवत्ता, विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी और निजी विद्यालयों का बढ़ता आकर्षण इसके प्रमुख कारण हैं।
ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के अभिभावक भी अब बेहतर अवसरों की तलाश में बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।
गणित, विज्ञान शिक्षकों के रिक्त पद बड़ी समस्या
पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। विशेषकर हाईस्कूल स्तर पर स्थिति अधिक गंभीर है।
पिछले छह वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया ठप रहने के कारण भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और छात्र निजी विद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं।
व्यावसायिक शिक्षा की ओर भी बढ़ रहा रुझान : निदेशक
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. मुकुल कुमार सती की मानें तो बोर्ड परीक्षाओं में छात्र संख्या घटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
बड़ी संख्या में छात्र अब व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा की ओर भी रुख कर रहे हैं। उनका दावा है कि सरकारी विद्यालयों में सुविधाएं और संसाधन लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, जिसका सकारात्मक असर आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा।