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    उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में लड़कियों का दबदबा कायम, एक बार फिर लड़कों को पछाड़ा

    Updated: Sun, 26 Apr 2026 03:39 PM (GMT+05:30)

    उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में इस बार भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में छात्राओं ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। ...और पढ़ें

    उत्तराखंड बोर्ड 10वीं व 12वीं का परिणाम जारी होने के बाद सीएनआइ गर्ल्स इंटर कालेज की छात्राएं खुशी मनाते हुए। जागरण

    उत्तराखंड बोर्ड 10वीं व 12वीं का परिणाम जारी होने के बाद सीएनआइ गर्ल्स इंटर कालेज की छात्राएं खुशी मनाते हुए। जागरण

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    राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में छात्राओं का दबदबा इस बार भी बरकरार रहा। बोर्ड परीक्षा में इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में लड़कियों ने एक बार फिर लड़कों को पछाड़ते हुए पास प्रतिशत में अपने श्रेष्ठता कायम रखी।

    हाईस्कूल में लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों की तुलना में 8.04 प्रतिशत अधिक है। वहीं इंटरमीडिएट में लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत लड़कों के मुकाबले 6.16 प्रतिशत ज्यादा रहा है।

    वर्ष 2016 से वर्ष 2026 तक लगातार 12 सालों में हाईस्कूल बोर्ड के पास प्रतिशत में ज्यादातर सालों में लड़कियां शिखर पर रहीं, केवल वर्ष 2023 में मामूली अंतर से लड़कों ने लड़कियों पर बढ़त बनाने में कामयाबी हासिल की थी।

    वर्ष 2023 में हाईस्कूल में 99.30 प्रतिशत लड़के उत्तीर्ण हुए, जबकि 98.86 लड़कियों ने कामयाबी प्राप्त की थी। इस बार हाईस्कूल में 88.03 प्रतिशत लड़के उत्तीर्ण हुए, जबकि 96.07 प्रतिशत लड़कियों ने कामयाबी हासिल की है।

    दूसरी ओर खुद को साबित करती बेटियों व समाज की लगातार बदलती सोच का असर 12वीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम में भी दिखा।

    उत्तराखंड बोर्ड के 12वीं के परीक्षा परिणाम में इस बार लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ते हुए कामयाबी का शिखर छुआ।

    इस बार इंटरमीडिएट में 81.93 प्रतिशत लड़के सफल हुए जबकि बोर्ड परीक्षा देने वाली 88.09 प्रतिशत लड़कियां उत्तीर्ण हुई हैं।

    लड़कियों की शिक्षा के प्रति समाज की बदली सोच : निदेशक

    विद्यालयी शिक्षा निदेशक डा मुकुल कुमार सती ने कहा कि लड़कों के मुकाबले लड़कियों का पास प्रतिशत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में अधिक होना लड़कियों की शिक्षा के प्रति समाज की बदलती सोच का परिणाम है।

    सरकारी शिक्षा व्यवस्था में जो आमूलचूल सकारात्मक परिवर्तन किए जा रहे हैं, उससे ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को पढ़ने के अधिक अवसर मिल रहा है।

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