उत्तराखंड: धामी के भरोसे हाईकमान ने साधा क्षेत्रीय, जातीय व गुटीय संतुलन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मिशन हैटट्रिक के तहत 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल का विस्तार किया। इसमें जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय समीकरणों को साधते हुए पहाड ...और पढ़ें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। मिशन हैटट्रिक को केंद्र में रखकर पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल की 12 सदस्यीय चुनावी टीम ने शुक्रवार को अपना पूर्ण आकार ले लिया। मुख्यमंत्री धामी ने एक तीर से कई निशाने साधे।
नई टीम में पांच नए मंत्रियों की एंट्री में जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय समीकरणों के साथ पहाड़ से मैदान तक संतुलन बिठाने की कवायद हुई।
पुराने और नए, जिन चेहरों पर दांव खेला है, भाजपा की रीति-नीति में आस्था के साथ विवादों-पचड़ों से दूरी बनाए रखने के उनके वर्तमान कौशल को खासतौर पर परखा गया।
मंत्रिमंडल विस्तार में पांच में से मात्र एक सीट कुमाऊं मंडल को देकर धामी ने हाईकमान के भरोसे को और पुख्ता किया है।
धामी के कंधों पर अगले विधानसभा चुनाव में पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी तो रहेगी ही, साथ में कुमाऊं मंडल में जीत का अंकगणित साधने का बड़ा दारोमदार भी रहने जा रहा है।
धामी सरकार की उपलब्धियों के साथ राजनीतिक स्थिरता को अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा तुरुप के पत्ते के रूप में इस्तेमाल करने जा रही है।
नव संवत्सर और चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन के शुभ मुहूर्त में मंत्रिमंडल को पूर्ण आकार देने की रणनीति को सरकार और संगठन में समन्वय और संयुक्त रोडमैप के तौर पर गढ़ा गया है।
23 मार्च को सरकार के चार वर्ष पूरे होने से पहले शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हल्द्वानी में जनसभा को संबोधित करेंगे।
कुमाऊं मंडल में भाजपा के चुनावी उद्घोष से एक दिन पहले मंत्रिमंडल विस्तार से जहां मुख्यमंत्री धामी का कद बढ़ा है, वहीं प्रदेश संगठन काे भी चुनावी मोड में आने के लिए नया संबल मिल गया।
धामी पर यह हाईकमान का भरोसा ही है कि उन्हें नए मंत्रियों के चयन में भी फ्री हैंड दिया गया।
विपक्ष को तलाश करने होंगे नए मुद्दे
यही नहीं, पांच नए मंत्रियों की ताजपोशी होने के बाद विपक्ष को भी नए मुद्दे तलाश करने होंगे। मुख्यमंत्री के पास 35 से अधिक विभाग होने और काम के अधिक बोझ को लेकर कांग्रेस निशाना साधती रही है।
मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल को पूर्ण आकार देकर कांग्रेस से यह मुद्दा छीन लिया। काम के इस बोझ को नए मंत्री स्वाभाविक रूप से साझा करेंगे।
वहीं कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष, चुनाव अभियान समिति व चुनाव प्रबंध समिति के अध्यक्ष के पदों समेत सांगठनिक स्तर पर जिस प्रकार गढ़वाल को प्राथमिकता दी, भाजपा ने भी मंत्रिमंडल में गढ़वाल मंडल के प्रतिनिधित्व को और मजबूत कर दिया।