उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, नहीं बढ़ेगा इलेक्ट्रिसिटी बिल
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 18.86% बिजली टैरिफ वृद्धि को खारिज कर दिया है। इससे राज्य के लगभग 28 लाख उपभोक ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
उत्तराखंड में 18.86% बिजली टैरिफ वृद्धि खारिज हुई।
28 लाख उपभोक्ताओं को बिजली बिल में मिली बड़ी राहत।
सिंगल प्वाइंट बल्क सप्लाई दरें घटीं, सौर ऊर्जा पर छूट।
जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड के करीब 28 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 18.86 प्रतिशत बिजली टैरिफ वृद्धि को सिरे से खारिज कर दिया है। इससे आम उपभोक्ताओं पर बढ़े हुए बिजली बिलों का बोझ नहीं पड़ेगा।
यह कदम राज्य सरकार की ओर से आमजन को सीधे तौर पर राहत देने के लिए उठाया गया है। ऊर्जा निगम, यूजेवीएनएल और पिटकुल की ओर से बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन आयोग ने टैरिफ को यथावत रखते हुए केवल संरचनात्मक सुधार (टैरिफ रेशनलाइजेशन) किए हैं।
आयोग ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाले बिना बिजली व्यवस्था को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। क्रास-सब्सिडी को राष्ट्रीय टैरिफ नीति के तय दायरे में रखा गया है, जबकि फिक्स्ड चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद की ओर से की गई पत्रकार वार्ता में नया विद्युत टैरिफ जारी किया गया।
बताया कि इसमें सबसे बड़ा बदलाव सिंगल प्वाइंट बल्क सप्लाई में किया गया है, जहां दर को 7.50 रुपये से घटाकर 6.25 रुपये प्रति केवीए कर दिया गया है। इससे बड़ी आवासीय सोसायटी और समूह कनेक्शनों को राहत मिलेगी। औद्योगिक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने लोड फैक्टर आधारित टैरिफ में बदलाव किया है।
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अब 50 प्रतिशत से अधिक लोड फैक्टर पर कम दर (6.60 रुपये प्रति केवीए) लागू होगी, जबकि कम उपयोग करने वालों को ज्यादा दर देनी होगी। सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन देते हुए 25 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को दिन के समय (सुबह नौ से शाम पांच बजे) 22.5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी।
इसके अलावा, निरंतर आपूर्ति अधिभार को आधा करते हुए 15 से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह तीसरा मौका है जब आयोग ने टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं की है।