बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी मामले के बाद बड़ा एक्शन, उत्तराखंड के सभी प्रमुख देवस्थानों के लिए बनेगी SOP
बदरीनाथ धाम के दान-चढ़ावा प्रकरण की जांच अब केवल घटना तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख देवस्थानों की सुरक्षा और प्रबंधन में व्यापक सुधार का अवसर ...और पढ़ें

सीएम पुष्कर सिंह धामी
HighLights
बदरीनाथ दान प्रकरण जांच अब व्यापक सुधार का अवसर।
प्रमुख मंदिरों के लिए एक समान एसओपी होगी तैयार।
पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बनेगी नई व्यवस्था।
राज्य ब्यूरो, देहरादून। बदरीनाथ धाम के दान-चढ़ावा प्रकरण की जांच अब केवल घटना और जिम्मेदार व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगी। शासन की ओर से गठित उच्च स्तरीय जांच समिति इस मामले को प्रदेश के प्रमुख देवस्थानों की सुरक्षा एवं प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक सुधार के अवसर के रूप में देख रही है।
समिति का फोकस उन व्यवस्थागत कमियों की पहचान करना है, जिनके कारण चढ़ावा प्रबंधन में अनियमितता की आशंका बनती है। इन्हीं निष्कर्षों से प्रमुख मंदिरों में चढ़ावा प्रबंधन, सुरक्षा, निगरानी व गणना के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी।
गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति जांच के साथ सुधार संबंधी सुझाव भी तैयार कर रही है। सूत्रों के अनुसार समिति केवल बदरीनाथ धाम की व्यवस्थाओं का परीक्षण नहीं कर रही, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी उपायों का भी अध्ययन कर रही है।
आवश्यकता पड़ने पर समिति प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों का भी निरीक्षण करेगी। वहां दानपात्रों की सुरक्षा, चढ़ावा संग्रह, सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश नियंत्रण, गणना प्रणाली और जवाबदेही तंत्र का अध्ययन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही को बनेगी व्यवस्था
समिति की सिफारिशों में चढ़ावा संग्रह से लेकर गणना और कोषागार तक धन पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित एसओपी विस्तृत होगी। इसमें दानपात्रों की सीलबंद ट्रैकिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी कवरेज, बहुस्तरीय निगरानी, वीडियो रिकार्डिंग, नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था और अधिकारियों-कर्मचारियों की स्पष्ट जवाबदेही जैसे प्रविधान शामिल होंगे, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बन सके।
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नीतिगत सुधार की बनेगी आधारशिला
सूत्रों का कहना है कि समिति की रिपोर्ट भविष्य की नीति निर्धारण का आधार बनेगी। इसमें प्रमुख देवस्थानों में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी, मानकीकृत गणना व्यवस्था और एक समान कार्यप्रणाली लागू करने की सिफारिशें होंगी।
यदि सरकार इन्हें लागू करती है तो मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और श्रद्धालुओं का विश्वास भी और अधिक सुदृढ़ होगा।
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