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    राजाजी नेशनल पार्क से ऋषिकेश पहुंचा जंगली हाथियों का दल, दहशत में लोग

    Updated: Wed, 27 May 2026 02:38 PM (IST)

    राजाजी नेशनल पार्क से हाथियों का एक बड़ा दल ऋषिकेश के खदरी खड़क माफ गांव पहुंचा है, जिससे किसानों में धान की बुआई और फसल नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई ह ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। ग्राम सभा खदरी खड़क माफ के उपजाऊ खादर क्षेत्र के समीप गंगा तटीय क्षेत्र में राजाजी नेशनल पार्क से हाथियों के एक बड़े दल की आमद से खादर क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

    किसानों को चिन्ता इस बात की है कि यहां एक दंत जंगली हाथी पहले से ही मौजूद है जो स्थानीय किसानों की चिन्ता का कारण बना हुआ है। उधर दूसरी ओर धान की पौध बुआई का समय हो चला है।

    ऐसे में जंगली हाथियों के बड़े दल की आमद से किसानों की चिन्ता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि सभी हाथी खेतों की ओर बढ़ते हैं तो पौध के नुकसान से खेत रोपाई से पहले ही बंजर रह सकते हैं।

    मुआवजे की श्रेणी से बाहर

    स्थानीय किसान भगवान सिंह नेगी का कहना है कि हमारे एक एकड़ भूमि में आम का बगीचा है जिसे साल दर साल जंगली हाथी क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। इससे पेड़ों की संख्या में हर साल कमी आ रही है। इससे हमारी आर्थिकी प्रभावित हो रही है।

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    हैरानी की बात यह है कि बागवानी करने वाले किसानों के आम बाग को वन विभाग की ओर से मुआवजा देने की श्रेणी से बाहर रखा गया है। इससे किसानों को मुआवजा राशि भी नहीं मिल पाती है।

    कृषि विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ विनोद प्रसाद जुगलान का कहना है कि हिमालय से निकलने के बाद गंगाजी का पहला खादर क्षेत्र खदरी वर्षों से अपने उपजाऊपन के लिए जाना जाता है, लेकिन किसानों लगातार बढ़ रही समस्याओं के कारण जिनमें सौंग नदी की बाढ़ से भू कटाव और वन्य जीवों से लगातार हो रहे फसल नुकसान के परिणाम स्वरूप खादर के किसान खेती से विमुख हो रहे हैं।

    अवैध प्लॉटिंग का कारोबार

    लगभग एक तिहाई से अधिक किसानों ने कृषि कार्य छोड़ दिया, जिसका नाजायज़ लाभ भूमाफिया ले रहे हैं। यहां अवैध प्लॉटिंग का कारोबार खूब फल फूलने लगा है, यदि ऐसा ही चलता रहा तो खादर से खदरी बने गांव का इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे। जो एक बड़ी चिन्ता का विषय है।

    ग्रामीणों की मांग है कि राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान के पीछे गांव की सीमा से सटे हुए 15 हेक्टेयर प्लांटेशन के निकट वन्यजीवों से सुरक्षा को हाथी खाई खुदान कराया जाए ताकि वन्यजीवों की आबादी क्षेत्र सहित खेतों में आमद को रोका जा सके।

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