हरिद्वार में संतों ने गोबर-गोमूत्र से खेली होली, ‘हरि’ व ‘हर’ से की विश्व शांति व लोक कल्याण की प्रार्थना
हरिद्वार के मां मायादेवी मंदिर में रंगभरी एकादशी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। संतों ने गाय के गोबर, गोमूत्र सहित पंचगव्य से होली खेली। ...और पढ़ें

मां मायादेवी के मंदिर में रंगभरी एकादशी का पर्व श्रद्धा, उल्लास व आध्यात्मिक महत्वता के साथ मनाया।

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। धर्मनगरी की अधिष्ठात्री देवी मां मायादेवी के मंदिर में रंगभरी एकादशी (आमलकी एकादशी) का पर्व श्रद्धा, उल्लास व आध्यात्मिक महत्वता के साथ मनाया गया।
इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न भागों से पधारे संत-महात्माओं ने गाय के गोबर, गोमूत्र, दूध, दही व मक्खन से बने पंचगव्य से होली खेली। साथ ही भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव व माता पार्वती से विश्व शांति व लोक कल्याण की प्रार्थना की।

होली कार्यक्रम में जगद्गुरु आश्रम के स्वामी राजराजेश्वराश्रम, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी, जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि ने कहा कि विवाह के उपरांत भगवान शिव इसी दिन माता पार्वती के साथ काशी पहुंचे थे, जहां देवताओं व शिवगणों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर उनका अभिनंदन किया था।

तभी से संतों में रंगभरी एकादशी पर होली की परंपरा प्रचलित है। इस मौके पर स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि का चादर विधि से विधिवत अभिषेक किया गया।

श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि हरिद्वार देवभूमि उत्तराखंड का प्रवेश द्वार है। ‘हरि’ व ‘हर’ अर्थात भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की इस पावन नगरी में की गई उपासना सीधे ईश्वर तक पहुंचती है।
श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि के नेतृत्व में सनातन धर्म को सुदृढ़ करने तथा उसकी पताका विश्वभर में फहराने का अभियान इसी पावन दिन से प्रारंभ होना शुभ संकेत है।

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि, महामंडलेश्वर हरिचेतानंद गिरि, महामंडलेश्वर शैलेंद्रानंद गिरि, महामंडलेश्वर आनंदेश्वरानंद गिरि, जूना अखाड़ा के महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी, महामंत्री श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि, महामंडलेश्वर कंचन गिरि, महंत गिरिशानंद गिरि, थानापति ज्वाला गिरि, मंदिर के पुजारी भास्कर पुरी, साध्वी शैलजा गिरि आदि मौजूद रहे।