रामनवमी पर अयोध्या में रामलला पर सूर्य तिलक, CBRI रुड़की की लेंस और संरेखण प्रणाली रही सफल
रामनवमी पर अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक सफलतापूर्वक किया गया। ...और पढ़ें

केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की की ओर से विकसित सूर्य तिलक प्रणाली के तहत रामनवमी पर अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में विराजमान रामलला के मस्तक पर सूर्य तिलक किया गया। साभार-संस्थान

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रुड़की। रामनवमी के अवसर पर केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की की ओर से विकसित सूर्य तिलक प्रणाली का शुक्रवार को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दोपहर 12 बजे से लेकर 12:08 बजे तक सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।
अर्ध-मेघाच्छन्न (सेमी-क्लाउडी) मौसम के बावजूद पूरे समय के दौरान सूर्य तिलक स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर रहा। जो सटीक अभियांत्रिकी एवं आस्था का एक और सफल व उत्कृष्ट उदाहरण है।
रामनवमी पर शुक्रवार को अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में विराजमान रामलला के मस्तक पर सूर्य तिलक किया गया।
इस वर्ष का आयोजन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह सूर्य तिलक मंदिर के निर्माण कार्यों की पूर्णता के पश्चात आयोजित किया गया।
सूर्य तिलक प्रणाली के सफल प्रदर्शन को सुनिश्चित करने के लिए लेंस प्रणाली को सावधानीपूर्वक साफ किया गया। साथ ही, पुनः संरेखित (रियलाइन्ड) एवं पुनः अंशांकित (रीकैलिब्रेट) भी किया गया।
रामनवमी पर सूर्य तिलक के सफलतापूर्वक प्रदर्शन को लेकर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर)-सीबीआरआइ रुड़की के विज्ञानियों और आप्टिका टीम ने विशेष तैयारियां की थी।
टीम ने आप्टिकल सेटअप की गहन सफाई, पूर्व-कार्यक्रम अंशांकन, संरेखण एवं परीक्षण कार्य संपन्न किया।
कार्यक्रम से एक दिन पूर्व 26 मार्च को निरंतर निगरानी तथा वास्तविक समय में समायोजन भी किए गए। ताकि निष्पादन पूर्णतः त्रुटिरहित रहे। टीम में सीबीआरआइ रुड़की के विज्ञानी डा. आरएस बिष्ट एवं अभियंता वी. चक्रधर सहित आप्टिका टीम शामिल थी।
यह भी पढ़ें- रामनवमी पर अयोध्या में श्री रामलला का दिव्य एवं अलौकिक सूर्य तिलक, पांच मिनट तक दमका ललाट
यह भी पढ़ें- अयोध्या में रामलला के तीसरे जन्मोत्सव पर धूम, 5 मिनट तक प्रभु के ललाट पर विराजेगा 'सूर्य तिलक'
यह भी पढ़ें- पीएम मोदी ने रामलला के सूर्य तिलक का किया वर्चुअल दर्शन, हाथ जोड़कर प्रभु श्रीराम को निहारा