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    क्‍यों नैनीताल में नए साल का जश्‍न मनाने नहीं पहुंचे सैलानी? खाली रह गए होटल, सामने आई वजह

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:00 AM (IST)

    थर्टी फर्स्ट पर नैनीताल में पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई, जिससे होटल और पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ। कारोबारियों ने पुलिस के डायवर्जन प्लान, एंट ...और पढ़ें

    थर्टी फर्स्ट पर नैनीताल के छोटे-मध्यम के साथ ही सुविधायुक्त होटलों में भी खाली रहे कमरे. File Photo

    थर्टी फर्स्ट पर नैनीताल के छोटे-मध्यम के साथ ही सुविधायुक्त होटलों में भी खाली रहे कमरे. File Photo

    HighLights

    1. थर्टी फर्स्ट पर नैनीताल में पर्यटकों की आमद घटी।

    2. डायवर्जन प्लान, रील्स से पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ।

    3. होटल, रेस्टोरेंट में 30-40% कमरे खाली रहे।

    किशोर जोशी, नैनीताल । सरोवर नगरी में थर्टी फर्स्ट पर पर्यटकों की कम आमद के बाद होटल-रेस्टोरेंट सहित अन्य कारोबार पर बुरा असर पड़ा। कारोबारियों का खुला आरोप है कि पर्यटक वाहनों को डायवर्ट करने के बहाने रोकने, एंट्री प्वाइंटों पर पुलिस की सख्ती से शहर के पर्यटन कारोबार पर चोट पड़ी। व्यवस्था बनाने के बहाने बेवजह सख्ती पर्यटक भगाओ वाला प्रकरण है। शहर के खुर्पाताल, नयना देवी बर्ड रिजर्व, ज्योलीकोट, गेठिया, बल्दियाखान, जोखिया, मंगोली तक होटलों में 50 से 70 प्रतिशत तक ही बुकिंग हो पाई।

    शहर की अधिकांश आबादी की आजीविका का मुख्य स्रोत पर्यटन है। शहर सहित आसपास के क्षेत्र में छोटे-बड़े एक हजार होटल, गेस्ट हाउस और होम स्टे हैं। सात सौ से अधिक टैक्सियां हैं। पांच सौ के करीब परिवारों की आजीविका पूरी तरह झील में नौकायन पर तो दो दर्जन से अधिक आउट डोर फोटोग्राफर हैं। सौ के करीब पंजीकृत तथा इससे अधिक अपंजीकृत पर्यटन गाइड हैं।

    स्नोव्यू, हिमालय दर्शन, बारापत्थर, केव गार्डन में सौ से अधिक छिटपुर व्यवसाय भी पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर हैं। इसके अलावा बारापत्थर से खुर्पाताल सड़क किनारे, सरिताताल, मंगोली, ज्योलीकोट से डोलमार, रूसी बाइपास, बेलुवाखान सहित अन्य स्थानों पर मैगी प्वाइंट सहित छोटे रेस्टोरेंट आदि भी आम तौर पर पर्यटकों पर ही निर्भर हैं लेकिन इस बार शहर में पर्यटकों की कम आदम से छोटे व मध्यम दर्जे के साथ ही उच्च स्तरीय सुविधा युक्त होटलों में भी 30-40 प्रतिशत कमरे खाली रहे।

    रेस्टोरेंटों में भी कम कारोबार हुआ। मां नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन का कहना है कि पर्यटक की नैनीताल के प्रति छवि पहले से ही पार्किंग इत्यादि को लेकर बेहद धूमिल हो चुकी है। पिछले दस सालों पार्किंग समस्या का समाधान नहीं हो सका है। शहर का पर्यटन पुलिस की नकारात्मक व्यवस्था की बलि चढ़ गया है।

    30 प्रतिशत होटलों में ही पार्किंग
    शहर में पार्किंग समस्या और पार्किंग शुल्क पांच सौ रुपया होना भी पर्यटकों को अखर रहा है। शहर के 70 प्रतिशत से अधिक होटलों के पास पार्किंग सुविधा नहीं है। डीएसए, मेट्रोपोल, सूखाताल, हल्द्वानी रोड, बीडी पांडे के समीप, भवाली रोड में कैलाखान में पार्किंग है। पुलिस के अनुसार शहर में होटलों की निजी सहित अन्य सार्वजनिक पार्किंग की क्षमता करीब पांच हजार है लेकिन इस बार तो पार्किंग स्थल भी आधे तक खाली रहे।

    खबरें और भी

    थर्टी फर्स्ट पर पुलिस की ओर से डायवर्जन प्लान को लेकर सख्ती से पर्यटकों की आमद कम हुई। इंटरनेट मीडिया पर नैनीताल को लेकर नकारात्मक रील्स के प्रचार ने आग में घी का काम किया। पुलिस की ओर से एंट्री प्वाइंट पर सख्ती की शिकायत पर्यटकों ने भी की है। पुलिस की ओर से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के कदमों का स्वागत है लेकिन पर्यटकों के साथ सख्ती निश्चित तौर पर कारोबार पर बुरा असर डाल रही है। - दिग्विजय बिष्ट, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन

    एंट्री प्वाइंटों पर किसी पर्यटक को नहीं रोका, न ही वापस भेजा। सख्ती भी नहीं की गई। नैनीताल के साथ ही रामनगर, मुक्तेश्वर क्षेत्र में भी डायवर्जन प्लान लागू किया गया था। बिना बुकिंग वाले पर्यटकों के वाहन भी पार्किंग उपलब्ध नहीं होने पर ही रोके गए और उनको शटल से भेजा गया। संभावना है कि होटलों में लुभावने पैकेज नहीं होने या अन्य कारणों से पर्यटक कम आए हों, पुलिस ने सिर्फ व्यवस्था बनाई।
    डा. जगदीश चंद्रा, एसपी, नैनीताल

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