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    नोएडा-गुरुग्राम के बाद नैनीताल में कर्मचारियों का प्रदर्शन, 8 घंटे की ड्यूटी व 20 हजार वेतन की कर रहे मांग

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 11:09 PM (IST)

    हल्दूचौड़ में मदरसन कंपनी के कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिसके कारण धक ...और पढ़ें

    मदरसन कंपनी के बाहर प्रदर्शन करते श्रमिक। जागरण

    मदरसन कंपनी के बाहर प्रदर्शन करते श्रमिक। जागरण

    HighLights

    1. कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि सहित 14 सूत्रीय मांगें रखीं

    2. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की

    3. वेतन वृद्धि पर सहमति न बनने से आंदोलन जारी

    संवाद सहयोगी, हल्दूचौड़ (नैनीताल)। बीते दिनों नोएडा और गुरुग्राम में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुए कर्मचारियों के आंदोलन की आवाज उत्तराखंड तक पहुंच चुकी है।

    सोमवार को वेतन वृद्धि सहित 14 सूत्रीय मांगों को लेकर मोटाहल्दू स्थित मदरसन कंपनी के सैकड़ों महिला व पुरुष कर्मचारियों ने तड़के नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    सुबह करीब पांच बजे कर्मचारी मिनी सिडकुल गेट के पास सड़क पर एकत्र हुए और वेतन बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन करने लगे।

    सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और पीएसी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सड़क पर बेरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, जिस पर प्रदर्शनकारी आक्रोशित हो गए।

    आरोप है कि पुलिस ने कर्मचारियों के समर्थन में पहुंचे छात्र महासंघ अध्यक्ष आशीष कबड़वाल और क्षेत्रीय जन समस्या निवारण संघर्ष समिति के संयोजक पीयूष जोशी के साथ धक्का-मुक्की की। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क किनारे खाली मैदान में भेज दिया।

    श्रमिकों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए करीब आठ बजे श्रमायुक्त कमल जोशी, एसपी सिटी मनोज कत्याल, एसडीएम रेखा कोहली और सीओ अमित सैनी की मध्यस्थता में श्रमिकों के प्रतिनिधिमंडल की कंपनी प्रबंधन से वार्ता कराई गई।

    करीब डेढ़ घंटे चली वार्ता में 14 में से 12 मांगों पर सहमति बन गई, लेकिन वेतन वृद्धि के मुद्दे पर मामला अटक गया। कंपनी प्रबंधन ने शासनादेश जारी होने के बाद वेतन बढ़ाने का आश्वासन दिया, जिस पर अधिकांश कर्मचारियों ने असहमति जताई।

    इसी बीच विधायक डा. मोहन सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान रमेश जोशी और पूर्व प्रधान शंकर जोशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।

    इसके बाद कर्मचारी फैक्ट्री गेट पर पहुंच कर धरने पर बैठ गए। बाद में विधायक के कहने पर कंपनी के एचआर हेड सुभाष तिवारी को मौके पर बुलाया गया, उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगें मान ली गई हैं और वेतन वृद्धि शासनादेश के बाद की जाएगी, लेकिन इस पर सहमत नहीं हुए।

    प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे और 20 हजार रुपये वेतन देने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर अड़े रहे।

    अधिकारियों के समझाने पर कुछ कर्मचारी फैक्ट्री में प्रवेश कर गए, जबकि कुछ अपने घर लौट गए। दोपहर साढ़े बारह बजे प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि वेतन वृद्धि होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

    भारी पुलिस बल रहा तैनात

    मदरसन कंपनी के कर्मचारियों के आंदोलन के उग्र होने की सूचना पर एसपी सिटी मनोज कत्याल के नेतृत्व में सीओ हल्द्वानी अमित सैनी, लालकुआं कोतवाल ब्रजमोहन राणा, कोतवाल चोरगलिया हरपाल सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक दीपक बिष्ट, चौकी इंचार्ज हल्दूचौड़ शंकर नयाल, चौकी इंचार्ज मंगल पड़ाव गौरव जोशी, चौकी इंचार्ज राजपुरा कृष्णा गिरी, रामनगर कोतवाल अरुण कुमार सैनी समेत लालकुआं, हल्दूचौड़, चोरगलिया, रामनगर, मंगल पड़ाव और राजपुरा सहित नैनीताल व ऊधम सिंह नगर के विभिन्न क्षेत्रों की पुलिस, महिला पुलिस और पीएसी और खुफिया विभाग के कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।

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    छात्र नेताओ से हुई तीखी नोंकझोंक और धक्का मुक्की

    प्रर्दशन कर रहे कर्मचारियों के समर्थन में पहुंचे छात्र महासंघ अध्यक्ष आशीष कबड़वाल और क्षेत्रीय जन समस्या निवारण संघर्ष समिति के संयोजक पीयूष जोशी की पुलिस से तीखी नोकझोंक और धक्का मुक्की भी हुई।

    इसके चलते कुछ देर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आशीष कबड़वाल को हिरासत में लेकर हल्द्वानी भेज दिया। दोपहर बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।

    इधर, आशीष कबड़वाल और पीयूष जोशी ने पुलिस पर मारपीट और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में दमन का आरोप लगाते हुए न्यायालय और मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस की यह कार्यवाही लोकतंत्र के अनुरूप नहीं है।

    बसें रोकीं, कर्मचारी खुद पहुंचे धरनास्थल

    सुबह करीब पांच बजे सिडकुल गेट पर कर्मचारियों को लेकर दो बसें पहुंचीं, जिनसे उतरकर उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर फैक्ट्री प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में अन्य बसों को रोक दिया गया। इसके बाद कई कर्मचारी अपने निजी साधनों से धरनास्थल तक पहुंचे।

    दूसरी शिफ्ट में नहीं पहुंचे कर्मचारी

    मंगलवार को पहली शिफ्ट में कर्मचारियों के आंदोलन के दोपहर को दो बजे वाली शिफ्ट में कोई भी कर्मचारी नहीं पहुंचा जिस कारण फैक्ट्री का कार्य बाधित हुआ।

    ये हैं कर्मचारियों की मांगें

    • आठ घंटे की ड्यूटी पर न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये किया जाए
    • ओवरटाइम का दोगुना भुगतान किया जाए
    • आठ घंटे की शिफ्ट लागू की जाए
    • जबरन ब्रेक न दिया जाए
    • अवकाश के दिन काम का वेतन एक माह के भीतर दिया जाए
    • ब्रेक के नाम पर वेतन न काटा जाए
    • खस्ताहाल बसों को सुधारा जाए और चालकों का व्यवहार ठीक किया जाए्र
    • कार्य स्थल में मोबाइल ले जाने की अनुमति दी जाए
    • धरने में शामिल कर्मचारियों को परेशान न किया जाए
    • महिला कर्मचारियों को मासिक धर्म के दौरान कार्य से राहत दी जाए
    • गौलापार क्षेत्र के मजदूरों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए

    कर्मचारी बोले- टी टाइम तक नहीं मिलता

    • प्रत्येक शिफ्ट में आठ घंटे काम लिया जाए, प्रबंधन ड्यूटी के दौरान टी टाइम भी नहीं देता हैं। - नेहा मेहता
    •  साढ़े 12 हजार रुपए के वेतन में घर चलाना मुश्किल है, बस में भेड़ बकरियां की तरह लाया जाता है। छुट्टी के बाद भी आधे घंटे तक काम लिया जाता है। - उमा भट्ट
    • महंगाई बढ़ रही है लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा शोषण कर मात्र 12500 दिए जाते है, जिससे घर चलाना मुश्किल है। - नेहा चोपड़ा
    • - एक तो सैलरी मानकों के अनुरूप नहीं दी जा रही दूसरी ओर ब्रेक के नाम पर साल में तीन महीने तक घर बैठा देते हैं। कार्यस्थल में फोन अलाउ नहीं है। घर में प्राब्लम आ जाए तो कैसे सूचना दी जाए। - भगवती

    कर्मचारी अपनी मांगो को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, जिनके समर्थन में हम भी गए थे। लेकिन पुलिस ने बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया। धक्का-मुक्की और मारपीट की। लोकतंत्र में यह अव्यवहारिक है।

    - पीयूष जोशी, संयोजक, क्षेत्रीय जन निवारण संघर्ष समिति

    श्रमिकों की सभी मांगें मान ली गई हैं, शासनादेश जारी होते ही वेतन वृद्धि भी कर ली जाएगी। श्रमिक किसी के बहकावे में ना आए।

    - सुभाष तिवारी, एचआर हेड, मदरसन कंपनी

    फैक्ट्री कर्मचारियों का आंदोलन चल रहा था। पुलिस कर्मचारियों के साथ है। लेकिन इसके आड़ में कुछ बाहर से पहुंचे उपद्रवी लोगों द्वारा माहौल को खराब करने का प्रयास किया गया। जिनसे पुलिस द्वारा सख्ती से निपटा गया। अगर फिर से ऐसी हरकत करेंगे तो कानून के प्रावधान के तहत मुकदमे, गैंगस्टर और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    - मंजुनाथ टीसी, एसएसपी, नैनीताल

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