गौलापार में प्रस्तावित जू सफारी के काम में आई तेजी, लिए गए मिट्टी के नमूने
गौलापार में प्रस्तावित जू सफारी के निर्माण कार्य में तेजी आई है, जिसके तहत निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल ने मिट्टी के नमूने लिए हैं। ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। गौलापार में प्रस्तावित जू सफारी (अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर) को लेकर प्रक्रियाओं में तेजी आई है। जू सफारी की प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट (पीपीआर) वन विभाग को सौंपने के बाद अब निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल ने मृदा जांच के लिए नमूने भी ले लिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, ब्रिडकुल ने लगभग 412 हेक्टेयर में बनने वाले जू सफारी की छह जगहों से मृदा के नमूने लिए हैं। नमूने उन जगहों से लिए गए हैं, जहां पर पक्के निर्माण होने प्रस्तावित हैं। इन नमूनों को जांच के लिए आइआइटी रुड़की भेजा जाएगा। साथ ही थर्ड पार्टी के माध्यम से मान्यता प्राप्त लैब से भी जांच कराई जाएगी। दोनों लैब की रिपोर्ट समान होने पर ही फाउंडेशन और डिजाइनिंग की प्रक्रिया आगे की ओर से बढ़ेगी।
अगर दोनों की रिपोर्ट में समानता नहीं आई तो फिर अन्य लैब से भी जांच कराई जाएगी। ब्रिडकुल के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप सिंह ने बताया कि जांच में यह देखा जाएगा कि जिस जमीन पर निर्माण होना है, वह उसे सहने के लायक है या नहीं।
निर्माण में उच्च मानकों का ध्यान रखा जाएगा। बता दें कि पिछले महीेने ब्रिडकुल ने वन विभाग को 270 करोड़ रुपये की प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट (पीपीआर) सौंपी थी। उन्नत सैटेलाइट आधारित सर्वेक्षण तकनीक से जमीन का सर्वे करने के बाद यह रिपोर्ट सौंपी गई।
2016 से अब तक सिर्फ बन पाई है चारदीवारी
जू सफारी के निर्माण का कार्य लगभग 10 वर्ष से अटका हुआ है। अक्टूबर 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर की नींव रखी गई थी, जिसका नाम बाद में बदलकर जू सफारी कर दिया गया।
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इसके बाद यहां 14.52 करोड़ रुपये से 13 किमी लंबी चारदीवारी बनाई गई। लेकिन, वर्ष 2021 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने प्रोजेक्ट पर आपत्तियां लगा दी थीं। इसके बाद वर्ष 2022 में मंत्रालय ने किसी भी कारिडोर के बाधित नहीं होने की शर्त रखते हुए चिड़ियाघर के काम को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी।
निर्माण का जिम्मा पहले ब्रेथवेट, अब ब्रिडकुल को
फिर 2024 में ब्रेथेवट कंपनी को डीपीआर बनाने का जिम्मा दिया गया था। कंपनी ने शुरुआती रिपोर्ट बनाकर शासन को सौंपी थी, लेकिन डीपीआर बनाने के लिए जरूरी धनराशि नहीं मिलने के कारण फिर प्रोजेक्ट रुक गया था। इसके बाद मई 2026 में निर्माण एजेंसी बदल दी गई और ब्रिडकुल को जिम्मेदारी दी गई।