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    उत्तराखंड हाई कोर्ट का अहम फैसला: बालिग जोड़े को अपनी मर्जी से जीने का अधिकार, पुलिस दे सुरक्षा

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 06:35 PM (IST)

    उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हरिद्वार के एक युवा जोड़े को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है, जिन्होंने परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी की थी। ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने हरिद्वार के जोड़े को सुरक्षा देने का निर्देश दिया

    2. कोर्ट ने कहा, वयस्क जोड़ों को अपनी मर्जी से विवाह का अधिकार

    3. पुलिस को परिवार के सदस्यों को समझाने के निर्देश दिए गए

    जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने हरिद्वार के एक युवा जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश हरिद्वार पुलिस को दिया है।

    न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में 19 वर्षीय विवाहित युवती की याचिका पर सुनवाई हुई। युवती ने इस वर्ष मार्च अपने परिवारों की इच्छा के विपरीत 20 वर्षीय युवक से विवाह किया था।

    पुरुष के लिए विवाह की विधिक आयु 21 वर्ष है, यानी वह उस आयु से कम का था। इसके बाद भी दोनों ने अपने-अपने परिवारों से मिल रही गंभीर धमकियों का हवाला देते हुए कोर्ट से सुरक्षा की मांग की।

    युवक प्राइवेट नौकरी करता है, जबकि महिला अपनी पढ़ाई कर रही है।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वयस्क होने और अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होने के नाते उन्होंने विधिक रूप से विवाह किया।

    महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के कारण जान का खतरा है जबकि मामले में पक्षकारों ने शादी की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवक की आयु कम होने के आधार पर शादी को रद किया जाना चाहिए।

    मामले की समीक्षा के एकलपीठ ने कहा कि वयस्क जोड़ों को बिना किसी हस्तक्षेप के अपनी इच्छा से विवाह करने का अधिकार है।

    कोर्ट ने हरिद्वार के बुग्गावाला के जोड़े को मिल रही धमकियों का आकलन करने व उनको सुरक्षा देने के निर्देश दिए। साथ ही कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि परिवार के सदस्यों को समझाएं।

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