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कम उम्र की प्रधान पर उत्तराखंड हाई कोर्ट सख्त, कहा- अयोग्य जनप्रतिनिधियों को हटा सकती है सरकार

Published: Sat, 16 May 2026 05:25 PM (GMT+05:30)

नैनीताल हाई कोर्ट ने बाजपुर की एक ग्राम प्रधान को निर्धारित आयु से कम होने पर पद से हटाने की याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

उत्तराखंड हाई कोर्ट।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले के विकासखंड बाजपुर के ग्राम हलालपुर की ग्राम प्रधान को निर्धारित योग्यता से कम आयु होने पर उनके पद से हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास कानूनन निर्वाचित प्रतिनिधियों को पद से हटाने की शक्ति है, जो निर्धारित योग्यताएं पूरी नहीं करते हैं। याचिकाकर्ता अंकित राणा ने याचिका दायर कर ग्राम प्रधान को पद से हटाने की प्रार्थना की थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के समय संबंधित ग्राम प्रधान की आयु 21 वर्ष से कम थी, जो कि पंचायती राज अधिनियम के तहत एक अनिवार्य योग्यता है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 138 (1) के तहत अयोग्य पाए जाने पर निर्वाचित प्रतिनिधि को पद से हटाया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले को लंबित रखने के बजाय इसे निस्तारित कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि वह इस संबंध में राज्य सरकार के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि यदि याचिकाकर्ता की ओर से कोई प्रत्यावेदन दिया जाता है, तो सरकार संबंधित ग्राम प्रधान को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देते हुए कानून के अनुसार शीघ्र निर्णय ले।

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