Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    लोकायुक्त नियुक्ति में देरी पर नैनीताल हाई कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम

    Updated: Thu, 14 May 2026 12:26 PM (IST)

    हाई कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी और सर्च कमेटी की बैठक न होने पर सरकार पर गहरी नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें

    नैनीताल हाई कोर्ट।

    नैनीताल हाई कोर्ट।

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य में अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की बैठक नहीं करने और कोर्ट से बार-बार समय मांगने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।

    कोर्ट ने सरकार को 24 घंटे के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। साथ ही पूछा है कि अब तक पूर्व के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया। कोर्ट ने जवाब पेश नही करने पर संबंधित सचिव को 15 मई को 11 बजे कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई को 15 मई की तिथि नियत की है।

    बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा कि पूर्व के आदेश का अनुपालन हुआ या नही? जिसपर सरकार ने कोर्ट से और समय देने की मांग की। कोर्ट ने बार बार समय की मांग करने पर नाराजगी व्यक्त की। पिछली तिथि को कोर्ट ने सरकार से कहा था कि तीन अप्रैल को जो सर्च कमेटी की बैठक होनी है।

    तीन अप्रैल को सर्च कमेटी की बैठक

    बैठक में लिए गए निर्णय को शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करें लेकिन तीन अप्रैल को सर्च कमेटी का कोरम पूर्ण नहीं होने के कारण उसकी बैठक नहीं हो पाई। जिसपर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की तिथि रखी थी। इससे पहले की तिथि पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए कोर्ट से छह माह का समय मांगा गया था, लेकिन कोर्ट ने तीन माह का समय देते हुए लोकायुक्त को नियुक्त करने को कहा था।

    खबरें और भी

    एक वर्ष बीत जाने के बात भी अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पाई। आज तक सर्च कमेटी की बैठक नही हो पाई जबकि इनकी नियुक्ति करने के लिए वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने कहा था कि एक वर्ष पहले भी सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए समय मांगा गया था, अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही हो पाई, अब और समय मांगा जा रहा है।

    यह थी याचिका

    गौलापार हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं क। जबकि संस्था के नाम पर वार्षिक तीन से चार करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। कर्नाटक में व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की ओर से भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है जबकि राज्य में हर एक छोटे से छोटा मामला हाई कोर्ट में लाना पड़ रहा है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है। राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है 'जिसके पास यह अधिकार हो की, बिना शासन की पूर्वानुमति के, किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर सके।

    सतर्कता विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाय।

    यह भी पढ़ें- इंदौर में लोकायुक्त का सख्त एक्शन : बयान से मुकरने वाले 21 फरियादियों पर केस, भ्रष्टाचार के मामलों में नया मोड़

    यह भी पढ़ें- टीकमगढ़ PG कॉलेज में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, 100000 रुपये रिश्वत लेते बाबू रंगेहाथ गिरफ्तार