कारगिल विजय दिवस : जब पति नहीं लौटे, तब मां ने पिता बनकर बच्चों को संभाला
कारगिल युद्ध में लांस नायक चंदन सिंह भंडारी के बलिदान के बाद उनकी पत्नी अनीता कुमारी ने अकेले ही तीन बच्चों को पाला। ...और पढ़ें

बलिदानी लांस नायक चंदन सिंह । सौ. जिला सैनिक कल्याण बोर्ड

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । कारगिल युद्ध में लांस नायक चंदन सिंह भंडारी के बलिदान के बाद उनकी पत्नी अनीता कुमारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीन छोटे बच्चों का भविष्य था।
पति के जाने के साथ ही उन्होंने मां के साथ पिता की जिम्मेदारी भी निभाई। दर्द सीने में दबाया, आंसू छिपाए और बच्चों को ऐसी परवरिश दी कि आज तीनों अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं।
20 जुलाई 1999 को मिली शहादत की सूचना
मूल रूप से नैनीताल के बेतालघाट ब्लाक के सिमलखा गांव निवासी चंदन सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1965 को हुआ था। वर्ष 1985 में वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। कारगिल युद्ध शुरू होने से पहले वह दो माह की छुट्टी पर घर आए थे, लेकिन महज 10 दिन बाद ही उन्हें वापस सीमा पर बुला लिया गया।
जाते समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह आखिरी विदाई होगी। 20 जुलाई 1999 को अनीता को पति की शहादत की सूचना मिली। उस समय बड़ी बेटी संध्या आठ वर्ष, बेटा नितेश छह वर्ष और सबसे छोटा बेटा निखिल केवल दो वर्ष का था। बच्चे रोज पूछते, पिताजी कब आएंगे? इस सवाल ने अनीता को भीतर तक तोड़ा, लेकिन उन्होंने बच्चों के सामने कभी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
शुरुआती दिनों में मायके और ससुराल का साथ मिला। सरकार से भी सहायता मिली। मगर सबसे बड़ा सहारा उनका अपना हौसला था। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी और हर संघर्ष का डटकर सामना किया। आज बड़ा बेटा निजी इंश्योरेंस कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत है, छोटा बेटा साफ्टवेयर इंजीनियर है और बेटी अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी रही है।
बेड़े बेटे की शादी हो गई है और छोटे की होनी है। उन्होंने बताया कि उनके पति की एक प्रतिमा उन्हें सेना से मिली थी, जिसे उनके गांव में स्थापित कर दिया गया है। अनीता कहती हैं, बच्चों को मुकाम तक पहुंचाकर उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने वीर पति के सपनों को टूटने नहीं दिया।