बाघ के डर से आबादी के बीच झाड़ियों में बसेरा बना रहे गुलदार, कर रहे शिकार
गुलदार बाघों के डर और बढ़ती संख्या के कारण जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में डेरा डाल रहे हैं। ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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ललित मोहन बेलवाल, हल्द्वानी। गुलदार जंगल से बाहर निकलकर आबादी के बीच बसेरा बना रहे हैं। पहाड़ से लेकर मैदान तक इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ गुलदारों के इस तरह आबादी वाले इलाकों में डेरा डालने के पीछे कई महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ के डर से गुलदार जंगल के कोर एरिया से बाहर आने को मजबूर हो रहे हैं। इसके साथ ही हाल के वर्षों में जंगलों में गुलदार की संख्या में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 की गणना के मुताबिक, प्रदेश में तीन हजार से ज्यादा गुलदार हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में इनकी संख्या काफी अधिक हो चुकी है। ऐसे में उनके बीच क्षेत्र को लेकर भी आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
इधर, वन क्षेत्रों से कुछ दूरी पर स्थित आबादी वाले इलाकों में उपजी झाड़ियों के चलते गुलदार को अपने प्राकृतिक वास जैसा ही अनुकूल वातावरण मिल रहा है। साथ ही उन्हें आसानी से शिकार भी मिल रहा है। इससे गुलदार को जंगल की तरह ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। सुरक्षा और आसान शिकार गुलदारों को आबादी के बीच ठहरने के लिए प्रेरित कर रहा है। भाखड़ा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी नवीन रौतेला ने बताया कि उपनिबंधक को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है कि रजिस्ट्री के दौरान ही प्लाट में सफाई का भी नियम तय कर दें।
बच्चीनगर में शावकों के साथ घूम रहा गुलदार
नैनीताल जिले में भाखड़ा वन रेंज के अंतर्गत बच्चीनगर में लगभग दो महीने से गुलदार और उसके शावक घूम रहे हैं। यहां खाली प्लाट में लंबी झाड़ियां उगी हैं। ऐसे में वह इनमें आसानी से रह रहा है और रात को शिकार के लिए निकलता है। इसी रेंज के भगवानपुर तल्ला में भी आबादी के बीच पिछले सप्ताह निर्माणाधीन मकान में गुलदार घूमता देखने को मिला।
गोशाला में आराम फरमा रहे गुलदार
चंपावत जिले में लोहाघाट के गुमदेश क्षेत्र के मानाढुंगा गांव में पिछले महीने एक गुलदार गोशाला में घुसकर आराम से बैठ गया। गोशाला में बंधी भैंस के पास गुलदार लगभग दो घंटे तक बैठे रहा। इसी तरह अल्मोड़ा के ज्योली गांव में पिछले सप्ताह गोशाला में गुलदार पहुंच गया। यहां घरों के आसपास उपजी झाड़ियों के चलते गुलदार को मुफीद वास मिल रहा है।
इंसानों के बीच रह सकते हैं गुलदार
वन्यजीव विशेषज्ञ डा. कमर कुरैशी बताते हैं कि जंगल में गुलदार की संख्या बढ़ गई है। वहां उन्हें बाघ का भी खतरा है। इस पर उसे आबादी में झाड़ी, पानी और भोजन तीनों मिल रहा है इसलिए उन्हें ऐसी जगहें ज्यादा सुरक्षित लग रही हैं। साथ ही जहां बाघों को मानवीय दखल बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होता है, वहीं गुलदार इंसानों के बीच छिपकर रह सकते हैं।