बीएससी-बीकॉम पड़ रहे भारी, बीच कोर्स से नाम कटवाकर बीए में एडमिशन ले रहे युवा
एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में छात्र बीएससी और बीकॉम जैसे कठिन पाठ्यक्रमों से बीए में संकाय बदल रहे हैं। ...और पढ़ें

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सुमित जोशी, हल्द्वानी। इंटरमीडिएट के बाद कई विद्यार्थी साथियों को देखकर बीएससी और बीकॉम जैसे कोर्स चुन लेते हैं। लेकिन, सिद्धांतों, सूत्र और न्यूमेरिकल्स से जब उनका सामना होता है तो पढ़ाई भारी लगने लगी है। एक से दो वर्ष खराब हो जाने पर छात्र-छात्राओं को इसका अहसास होता है।
एमबीपीजी कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ऐसे ही विद्यार्थी आ रहे हैं। जिनका पहले से स्नातक विज्ञान या कॉमर्स में दाखिला है, मगर पिछले सेमेस्टरों में बैक आ गई। ऐसे में अब नाम कटवाकर बीए में एडमिशन के लिए आवेदन कर रहे हैं।
रोजाना आ रहे इस तरह के 15 से 20 मामले
महाविद्यालय में रोजाना इस तरह के 15 से 20 मामले आ रहे हैं। जिसमें सर्वाधिक बीएससी के तीसरे और पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी है। कुछ प्रकरण बीकॉम के हैं। जिन्होंने स्नातक प्रथम सेमेस्टर में दाखिला लेने के लिए फिर से फार्म भरा है। कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले अपना पुराना पंजीकरण एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय से जारी नामांकन संख्या को रद करवा रहे हैं।
कॉलेज में 17 जुलाई से प्रवेश शुरू हुए हैं और अभी तक 250 से अधिक नामांकन रद कराने के मामले आ चुके हैं। वहीं, तीन से चार बीए में प्रवेशित विद्यार्थियों के मामले भी आए हैं। यह ऐसे छात्र हैं जिन्होंने 2020-21 के आसपास दाखिला लिया था, लेकिन पाठ्यक्रम को पांच वर्ष की निर्धारित अवधि में पूरा नहीं किया। ऐसे में अब दोबारा से बीए करना चाहते हैं।
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संकाय बदलने को नामांकन रद कराना जरूरी
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रविधानों के अनुसार किसी भी विद्यार्थी की एक विश्वविद्यालय में एक ही नामांकन संख्या होनी चाहिए। एक से अधिक नामांकन संख्या होने पर उनकी डिग्री रद हो सकती है। इसलिए छात्र-छात्राएं अगर संकाय बदलते हैं तो उन्हें कुवि से जारी पिछली नामांकन संख्या को रद कराना हाेगा।
महाविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया गतिमान है। कुछ पूर्व में पंजीकृत विद्यार्थी संकाय परिवर्तन के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी पिछली नामांकन संख्या रद कराने के लिए विश्वविद्यालय को पत्र भेजा जा रहा है। - प्रो. एनएस बनकोटी, प्राचार्य
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