डेटिंग एप से दोस्ती, संबंध बने और फिर दर्ज कराया दुष्कर्म का मामला, नैनीताल हाई कोर्ट ने रद किया केस
हाई कोर्ट ने डेटिंग ऐप पर दोस्ती के बाद दुष्कर्म के आरोप में चल रही कानूनी कार्रवाई रद की। कोर्ट ने माना कि वयस्क महिला ने आपसी सहमति से संबंध बनाए थे ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने सहारनपुर निवासी अंकुश सहगल के विरुद्ध चल रही कानूनी कार्रवाई को रद कर दिया। अंकुश पर विवाह का झूठा वादा करके दुष्कर्म का आरोप था। यह निर्णय आपसी सहमति से बने रिश्तों, विशेषकर टिंडर जैसे माडर्न डेटिंग प्लेटफार्म के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण व्याख्या है।
दरअसल अगस्त 2019 में सहगल और शिकायतकर्ता नैनीताल जिले की महिला की मुलाकात टिंडर ऐप पर हुई थी। दोनों में मित्रता हुई और यह रिश्ता रोमांटिक और शारीरिक संबंधों में परिवर्तित हो गया। आपसी सहमति से बने संबंध तब कानूनी विवाद में परिवर्तित हो गया जब महिला ने मार्च 2021 में धारा-376 के तहत मामला दर्ज कराया।
न्यायिक प्रक्रिया का होगा दुरुपयोग
आरोप लगाया कि सहगल ने विवाह का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ का तर्क था कि शिकायतकर्ता वयस्क है और अपने निर्णय ले सकती है, वह अपनी इच्छा से इस रिश्ते में शामिल हुई थी। कोर्ट ने माना कि रिश्ते की प्रकृति को देखते हुए, कानूनी कार्रवाई जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
कोर्ट ने कहा कि अगर शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने हों और उनमें कोई जबरदस्ती या धोखा न हो, तो सिर्फ विवाह का वादा टूटने के आधार पर आइपीसी की धारा-376 के तहत आरोप साबित नहीं किए जा सकते।
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कोर्ट ने इस बात पर बल दिया कि हालांकि गलत इरादे से किए गए झूठे वादे आपराधिक धाराओं के तहत आरोपों को सही ठहरा सकते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था, क्योंकि इसमें सामान्य रिश्ते के दायरे से बाहर कोई धोखेबाजी की मंशा सिद्ध नहीं हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।