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    नई शिक्षा नीति का कमाल, पढ़ाने की उम्र में बीए-बीकॉम की रेगुलर पढ़ाई को भरा फॉर्म

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 08:07 AM (IST)

    नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू होने के बाद अब अधिक उम्र के लोग भी नियमित स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले रहे हैं। ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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    सुमित जोशी, हल्द्वानी। वैसे तो पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। व्यक्ति जीवनभर कुछ न कुछ नया सीखता ही रहा है, लेकिन आमतौर पर विद्यार्थी 25 वर्ष की उम्र तक स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं। इसके बाद उनके पास अध्ययन के लिए मुक्त विश्वविद्यालय का विकल्प रहता है।

    मगर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने की बाद यूजी में प्रवेश के प्रविधान बदल गए हैं। ऐसे में अब लोग करियर में आगे बढ़ने और बच्चों को पढ़ाने की आयु में रेगुलर बीए और बीकॉम करने के लिए आगे आ रहे हैं।

    रेगुलर बीए और बीकॉम करने के लिए आ रहे आगे 

    प्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें 26 से 45 वर्ष आयु तक के 56 लोगों ने समर्थ पोर्टल के माध्यम से स्नातक प्रथम सेमेस्टर में दाखिले के लिए आवेदन किया है। इसमें सर्वाधिक चार फार्म 45 उम्र वालों की ओर से भरे गए हैं। 42, 35, 32 और 31 वर्ष के एक-एक आवेदक कॉलेज को प्राप्त हुए हैं।

    वहीं, 26 से 30 आयु वर्ग के बीच 30 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने यूजी में प्रवेश की इच्छा जताई है। इनमें से अधिकांश आवेदन स्नातक कला यानी बीए पाठ्यक्रम के लिए किए गए हैं। पांच फार्म बीकॉम में दाखिले को आए हैं। अधिक आयु के लोगों की ओर से यूजी की रेगुलर पढ़ाई के लिए फार्म भरे जाने से प्राध्यापक हैरान हैं।

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    गैप होने पर पहले घट जाते थे पांच प्रतिशत अंक

    स्नातक में प्रवेश लेने के लिए इंटरमीडिएट में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। एनईपी-2020 के प्रविधान लागू होने से पहले इंटर के बाद स्नातक में प्रवेश लेने में ईयर गैप होने पर प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत अंक घट जाते थे।

    ऐसे में एक निश्चित समय के बाद यूजी में रेगुलर प्रवेश नहीं मिल पाता था। लेकिन, एनईपी लागू होने के बाद ईयर गैप होने पर अंकों में कटौती की व्यवस्था खत्म हो गई है। ऐसे में अब कोई भी और किसी भी उम्र में रेगुलर स्नातक कर सकता है।

    एनईपी लागू होने के बाद स्नातक में प्रवेश के नियमों में बदलाव हुए हैं। इसी व्यवस्था के कारण अधिक आयु के लोगों की ओर से यूजी प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश के लिए आवेदन किया है। - प्रो. एनएस बनकोटी, प्राचार्य

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