यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 22, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण मामले में पुनर्विचार याचिका
राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में दस फीसद क्षैतिज आरक्षण को खारिज करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है। ...और पढ़ें

नैनीताल, [जेएनएन]: राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में दस फीसद क्षैतिज आरक्षण को खारिज करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है।
याचिका में राज्य आंदोलनकारियों को पीड़ित बताते हए राहत और पुनर्वास नीति का हकदार बताया गया है। साथ ही कहा है कि अब तक मुजफ्फरनगर कांड में महिलाओं से दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा हत्या के मामलों के आरोपियों को सजा नहीं हुई है। अधिवक्ता रमन साह ने बताया कि पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है।
इस पर सुनवाई सोमवार या मंगलवार तक हो सकती है। यहां बता दें कि राज्य आंदोलनकारियों को दस फीसद क्षैतिज आरक्षण के मामले में खंडपीठ के दो जजों द्वारा अलग अलग राय दी गई। जिसके बाद मामला मुख्य न्यायाधीश द्वारा तीसरी बेंच को रेफर कर दिया। तीसरी बैंच ने आरक्षण को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में राय दी तो आरक्षण का फ़ैसला असंवैधानिक हो गया।