भारत में मानसूनी वर्षा पर अल नीनो का खतरा, विशेषज्ञ जता रहे चिंता
प्रशांत महासागर में गर्म पानी के बढ़ते प्रवाह से शक्तिशाली अल नीनो की संभावना बढ़ी है, जिससे भारत में मानसूनी वर्षा कम हो सकती है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

समय कम है?
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जागरण संवादाता, नैनीताल। मौसम पूर्वानुमान के वैश्विक माडलों के अनुसार प्रशांत महासागर में गर्म पानी के बढ़ते प्रवाह जैसे कारण इस बार मजबूत अल नीनो की संभावना को बढ़ा रहे हैं।
यदि अल नीनो शक्तिशाली रहा तो भारत में मानसूनी वर्षा कम होगी। अब राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनएओओ) की शुक्रवार को जारी होने जा रही रिपोर्ट के बाद यह तस्वीर अधिक स्पष्ट हो जाएगी।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ पर्यावरण विज्ञानी डा.नरेंद्र सिंह का कहना है कि इस बार अल नीनो के सुपर अल नीनो में परिवर्तन होने की संभावना दुनिया के अनेक देशों के मौसम के जानकार जताने लगे हैं।
फिलहाल यह संभावना करीब 25 प्रतिशत है। वर्तमान में प्रशांत महासागर सागर के पानी का तापमान निरंतर बढ़ रहा है। इससे माना जा रहा है कि यह पूर्व में सक्रिय हुए अल नीनो की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली होगा।
महासागरों का अध्ययन करने वाली एनएओओ समेत कई संस्थाए निरंतर इसके अध्ययन में जुटी हुई हैं।
इसका असर विश्व के मौसम को अधिक प्रभावित करेगा और भारत में मानसूनी वर्षा में भी कमी के रूप में दिखेगा।
डा.नरेंद्र के अनुसार अल नीनो अधिक शक्तिशाली रहने का पूर्वानुमान भारतीय मौसम विभाग भी जता चुका है।
यदि यह अल नीनो सुपर अल नीनो में परिवर्तित हुआ तो मौसम की स्थितियां अधिक बदलेंगी। जिसके चलते अल नीनो पर संस्थाओं व मौसम विशेषज्ञों की नजरें बनी हुई हैं।
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