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    ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन हाईवे का काम रहेगा जारी, हाई कोर्ट से NHAI को मिली बड़ी राहत

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 06:15 AM (IST)

    उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना में पेड़ों की कटाई को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के खिलाफ दायर अवम ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट से नेशनल हाइवे अथॉरिटी को बड़ी राहत, अवमानना याचिका खारिज

    हाई कोर्ट से नेशनल हाइवे अथॉरिटी को बड़ी राहत, अवमानना याचिका खारिज

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने NHAI की अवमानना याचिका खारिज की।

    2. ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन परियोजना को मिली हरी झंडी।

    3. पेड़ों की कटाई पर कोई अंतरिम रोक नहीं।

    जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने पर्यावरणविदों की ओर से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।

    याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना के लिए की जा रही पेड़ों की कटाई कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से किसी भी अदालती आदेश की अवहेलना नहीं की गई है और वर्तमान में इस परियोजना पर कोई अंतरिम रोक या प्रतिबंध लागू नहीं है।

    इससे पहले नौ जनवरी 2026 को ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा था कि बहुचर्चित 'हाथी कॉरिडोर' का विवाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही पूरी तरह तय किया जा चुका है। इसके बाद, जब 18 मार्च 2026 को एक स्पष्टीकरण याचिका दायर की गई, तब भी हाई कोर्ट ने साफ कर दिया था कि पेड़ों की कटाई पर पूर्व में लगाई गई अंतरिम रोक की अवधि को कभी आगे नहीं बढ़ाया गया था, जिसका सीधा मतलब है कि परियोजना को रोकने के लिए कोई कानूनी आदेश अस्तित्व में नहीं था।

    इस परियोजना के मार्ग में आने वाले कुल 4,639 पेड़ों को हटाने के लिए चिह्नित किया गया है। एनएचएआई ने कोर्ट को बताया था कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधते हुए कुल 754 पेड़ों को पूरी तरह काटने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से सुरक्षित रूप से दूसरी जगह प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) करेगा।

    इसके अतिरिक्त, संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र होने के कारण हाईवे पर हाथियों और अन्य जानवरों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं । जिसके तहत एलीफेंट अंडरपास, प्राकृतिक हरी झाड़ियों की सुरक्षा दीवारें और विशेष वन्यजीव चेतावनी संकेतक लगाए जाएंगे।

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    राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, इन सभी सुरक्षा उपायों का खाका वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार किया गया है और इसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां पहले ही प्राप्त की जा चुकी हैं। याचिका को खारिज किए जाने के बाद अब इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में आ रही अंतिम कानूनी बाधा भी पूरी तरह समाप्त हो गई है।

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