चारधाम के लिए जारी एसओपी में होगा बदलाव, हाई कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा में अव्यवस्था और पशु क्रूरता पर सुनवाई की। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा में फैली अव्यवस्था और तीर्थ स्थलों में पशुओं के साथ हो रही क्रूरता के मामले पर जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए तीर्थ स्थलों पर जानवरों पर हो अत्याचार कम करने व श्रद्धालुओं की यात्रा को सरल सुगम बनाए जाने को लेकर सरकार की तरफ से जारी एसओपी या मानक संचालन प्रक्रिया में फिर से संशोधन करने को कहा है।
साथ ही मार्ग पर चलने वाले पशुओं के लिए पशु चिकित्सालय के बारे में पशु प्रेमी की ओर से दिये गए सुझाव पर भी विचार करने को कहा है। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि यात्रा को सरल सुगम व पशुओं की देखभाल करने के लिए पूर्व में ही नई एसओपी जारी कर दी गयी है। जिस पर कोर्ट ने कहा कि यात्रा में किसी को कोई परेशानी न हो, ऐसे में एसओपी का एक बार फिर से परीक्षण किया जाय। अब कोर्ट इस मामले में तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगी है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में पशु प्रेमी गौरी मौलखी व दिल्ली के आचार्य अजय गौतम सहित अन्य ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि उत्तराखंड के चारधाम सहित अन्य तीर्थस्थलों में फैली अवस्थाओं व जानवरों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए सरकार की ओर से जारी एसओपी का अनुपालन सही तरीके से नही हो पा रहा है।
उसे धरातल पर उतारने के लिए एक निगरानी कमेटी बनाने के साथ ही जानवरों और इंसानों की सुरक्षा के साथ उनको चिकित्सा सुविधा दी जाए। याचिका में कहा है कि चारधाम यात्रा में भीड़ बढ़ने से जानवरों और इंसानों को खाने रहने की समस्या आ रही है। पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। यात्रा में वहन क्षमता
के हिसाब से ही श्रद्धालुओं व घोड़े- खच्चरों को भेजा जाए। राज्य सरकार एसओपी को कठोरता से लागू करे।