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    उत्तराखंड में जमीन खरीद रहे नेपाली मूल के लोग, हाई कोर्ट सख्त; सरकार से मांगा जवाब

    Updated: Wed, 20 May 2026 05:07 PM (GMT+05:30)

    नैनीताल हाई कोर्ट ने उत्तराखंड में नेपाली मूल के निवासियों द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और भूमि खरीद के मामले में सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मां ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह में मांगा जवाब.

    हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह में मांगा जवाब.

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    जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने नेपाली मूल के निवासियों की ओर से खुद को भारतीय बताकर नैनीताल के आसपास सरकारी व वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा किये जाने के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से पूछा कि यह नेपाली मूल के लोग किस नीति के तहत भारत में रह रहे हैं और इनकी ओर से कैसे भूमि खरीदी जा रही है। कोर्ट ने इस पर तीन सप्ताह में जवाब देने को हा है।

    सरकार ने शपथपत्र पेश किया

    बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकार ने शपथपत्र पेश कर कहा कि 1950 की नियमावली के तहत भारतीय नेपाल में और नेपाली भारत में रहने के साथ ही रोजगार कर सकते है जबकि याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि नियमावली के अनुसार अगर कोई नेपाली भारत में जमीन लेता है तो वह आरबीआई के माध्यम से खरीदी जाएगी।

    भारतीयों को ये सुविधा नेपाल में नहीं मिली हुई है। नैनीताल निवासी पवन ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि नैनीताल शहर की समीपवर्ती ग्राम सभा के खुर्पाताल के तोक खाड़ी में बजून चौराहे के पास नेपाली मूल के करीब 25 परिवार के लोगों ने सरकारी व नजूल भूमि पर कब्जा कर आवासीय निर्माण कर लिया है।

    आरोप लगाया कि इन लोगों ने नागरिकता हासिल करने के लिए कोई आवेदन नहीं किया और ना ही भारत की नागरिकता हासिल की। अवैध तरीके से आधार कार्ड, आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, स्थाई निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सेवाएं कार्ड आदि बनाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जा रहा है। अवैध तरीके से पानी बिजली के कनेक्शन भी हासिल कर लिए।

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