उत्तराखंड में सैन्य परिवारों का सियासी गणित, भाजपा के लिए जीत की कुंजी
उत्तराखंड में सैन्य परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण है। लगभग पौने तीन लाख सैनिक और पूर्व सैनिक मतदाता चुनावी समीकरणों को प्र ...और पढ़ें

रक्षा मंत्री से लेकर सीएम के भाषण में सैन्य परंपरा का बार-बार जिक्र.

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गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में सैन्य परिवारों की अहम भूमिका है। हर गांव में सैनिकों की वीरगाथा सुनने को मिल जाती है। सैन्य बहुल प्रदेश होने के कारण यह वर्ग सियासी समीकरण को बनाने और बिगाड़ने की ताकत भी रखता है।
भाजपा के रणनीतिकार इस बात को बखूबी समझते हैं कि चुनावी जंग में जीत के लिए सैन्य परिवारों का साथ जरूरी है। शनिवार को हल्द्वानी में आयाेजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूूमि की सैन्य परंपरा का कई बार जिक्र भी किया।
2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में सैनिक व पूर्व सैनिकों की संख्या करीब पौने तीन लाख थी। परिवार से जुड़े वोटरों की संख्या जोड़ने पर इनकी सियासी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व हर दल इन्हें अपने पाले में करने की भरपूर कोशिश करता हैै।
एमबी इंटर कालेज में आयोजित 'चार साल बेमिसाल' कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक भी पहुंचे थे। इस दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सौम्य और सरल कहे जाने वाले उत्तराखंड के लोगों ने जरूर पड़ने पर देश की रक्षा के लिए पर्वत जैसी अटलता दिखाई है।
इस पराक्रमी धरती से जुड़े वीर जवानों ने सीमाओं की सुरक्षा के लिए बलिदान देने से कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे। धामी सरकार ने इनके अदम्य साहस और योगदान के सम्मान में कोई कमी नहीं की। उत्तराखंड पहला राज्य है जहां परमवीर चक्र विजेता को डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाते हैं। सैन्य धाम के माध्यम से सैन्य परंपरा को भी जीवंत किया गया है।
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अब गोली का जवाब गोलों से देते हैं: धामी
सीएम ने कहा कि हम सैन्य बहुल क्षेत्र के लोगों को पता है कि 2014 से पहले दुश्मन पर एक गोली चलाने के लिए भी मंजूरी लेनी पड़ती है। लेकिन बदले भारत में गोली का जवाब गोलों से दिया जाता है। जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें हरसंभव सुविधाएं दी गई है। कभी छोटे-छोटे रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था।
मगर आज रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों में नाम शामिल हो चुका है। पीएम और रक्षा मंत्री के नेतृत्व में हुई सर्जिकल स्ट्राइक और आपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि जरूरत पड़ी तो सेना घर में घुसकर मारेगी। सीएम ने कहा कि एक दौर कांग्र्रेस का था। जब दुश्मन के हमलों की निंदा करने के अलावा औैर कुछ नहीं होता था।
सैनिक का बेटा सीएम, पूर्व सैनिक मंत्री
पुष्कर सिंह धामी एक सैनिक के बेटे हैं। कई बार वह सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि सैन्य परिवारों की परेशानी को उनसे बेहतर कोई नहीं समझता। यही वजह है कि राज्य स्तर से भी कई योजनाएं संचालित की गई है। वहीं, धामी सरकार में सैनिक कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे गणेश जोशी खुद भारतीय सेना का हिस्सा रह चुके हैं।
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