कूड़ा उठाते पूरे गांव के लिए प्रेरणा बनीं उत्तराखंड की 25 महिलाएं, गाड़ी चलाने से लेकर गार्बेज कलेक्शन; सब इनके हाथ
रामनगर की मिताली और वेस्ट वारियर्स संस्था ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास 12 गांवों में 25 ग्रामीण महिलाओं को कचरा प्रबंधन का नेतृत्व करने के लिए सशक्त ...और पढ़ें

रामनगर में वेस्ट वारियर्स से जुड़ी मिताली रावत।

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त्रिलोक रावत, रामनगर। कहते हैं बदलाव बड़ी ताकत से नहीं, छोटे-छोटे प्रयासों से होता है। रामनगर की संस्था से जुड़ी मिताली ने यह बात सच साबित करके दिखा दी है। वर्तमान में मिताली न केवल पर्यावरण को संरक्षित कर रही हैं बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी संस्था से जोड़कर कार्बेट टाइगर रिजर्व को साफ-सुथरा रखने में अहम योगदान दे रही हैं।
मिताली ने बताया कि तीन महिलाओं से शुरू हुई स्वच्छता की इस मुहिम के तहत गांव की 25 महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण की कमान संभाल ली है। स्वच्छता की यह पहल आज 12 ग्राम पंचायतों में संचालित हो रही है। मिताली ने बताया कि वेस्ट वारियर्स ने इस क्षेत्र में 2021 से स्वच्छता पर काम शुरू किया था। इसके पीछे मकसद पर्यटन के लिए जाना जाने वाला कार्बेट टाइगर रिजर्व को साफ-सुथरा रखना है।
पहले लोग अपने घरों के कूड़े को इधर-उधर फेंक देते थे तो इससे पूरा पर्यावरण खराब हो रहा था। उन्होंने जब पर्यावरण दूषित होते देखा तो साफ करने के लिए रूपरेखा तैयार की। शुरू में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। काफी प्रयास से पहले तीन-चार महिलाएं संस्था जुड़ीं तो काम करने के लिए प्रोत्साहन मिला। आज स्वच्छता की इस मुहिम से गांव की 25 महिलाएं पर्यावरण सखी के रूप में काम करती हैं।
रिगोंड़ा, ढिकुली, क्यारी, हिम्मतपुर, सांवल्दे पूरब, पश्चिम, ढेला, लछमपुर, आनंदनगर, गौतमनगर, गर्जिया क्षेत्र आदि क्षेत्र में कचरा प्रबंधन का क्रियान्वयन हो रहा है। प्रत्येक घर से महिलाएं कूड़ा प्रबंधन के लिए 50 रुपये महीना शुल्क भी लेती हैं। सूखा कूड़ा बेचा भी जाता है। महिलाओं को इससे आजीविका भी होती है। कचरा प्रबंधन के कार्य में जो खर्चा होता है, उसमें आवश्यकता पड़ने पर वेस्ट वारियर्स भी मदद करती है।
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छोटी गाड़ी, बड़ा बदलाव, कूड़ा गाड़ी खुद चलातीं है महिलाएं
रामनगर: कार्बेट क्षेत्र से जुड़े गांवों की 25 महिलाएं पांच गाड़ियों से घर-घर से सूखा और गीला कूड़ा एकत्र करती हैं। महिलाएं कूड़ा गाड़ी खुद ही चलाती हैं। घरों में अलग-अलग कूड़ा रखने को बैग दिए हुए हैं। घरों से गाड़ी में कूड़ा एकत्र कर वह वेस्ट बैंक सेंटर में लाती हैं।
हिम्मतपुर डोटियाल और रिंगोड़ा में वेस्ट बैंक बनाए गए हैं। इन सेंटर में महिलाएं सूखे कूड़े को छांटती है। इसके बाद सूखे कूड़े को बेचा जाता है। मिताली ने कहा कि एक साल में महिला पर्यावरण सखियां 1.30 लाख किलो कूड़ा एकत्र कर चुकी हैं। गीले कूड़े से पहली बार अब खाद तैयार करने का काम शुरू किया जा रहा है।