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    उत्तराखंड के दीनदयाल ने बागवानी से बदली तकदीर, सालाना कमा रहे चार लाख रुपये

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 12:26 PM (GMT+05:30)

    दीनदयाल बिष्ट ने पौड़ी गढ़वाल में सेब और कीवी की बागवानी से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। ...और पढ़ें

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    बुद्धि सिंह रावत, बीरोंखाल। पलायन और सीमित रोजगार की चुनौती के बीच उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी आज आजीविका का सशक्त माध्यम बन रही है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित बागवानी एवं किसान हितैषी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आयवृद्धि का नया आधार तैयार कर रही हैं। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण के सुकई (बंज्वाड़) गांव निवासी दीनदयाल बिष्ट इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं।

    दीनदयाल बिष्ट वर्तमान में विकासखंड बीरोंखाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज बैजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं। कोविड लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने गांव की अनुपयोगी भूमि का सदुपयोग करने का निर्णय लिया और वैज्ञानिक पद्धति से सेब एवं कीवी की बागवानी शुरू की। शुरुआत एक छोटे प्रयास के रूप में हुई। लेकिन, आज यह उनकी अतिरिक्त आय का सशक्त स्रोत बन चुकी है।

    आय का सशक्त स्रोत

    अपने बाग के विकास में उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ लिया। मनरेगा के माध्यम से बाग की घेरबाड़ कराई गई, कृषि विभाग की सहायता से जियोटैंक एवं हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिए सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई, जबकि उद्यान विभाग ने पौध चयन, पौधरोपण, रखरखाव और वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

    आज दीनदयाल बिष्ट आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक बागवानी के माध्यम से प्रत्येक सीजन में लगभग 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किया जाए और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया जाए तो पर्वतीय क्षेत्रों में भी बागवानी लाभकारी एवं टिकाऊ स्वरोजगार का माध्यम बन सकती है।

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    जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी ने बताया कि जनपद में सेब, कीवी सहित उच्च मूल्य वाली फल बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण तथा विभागीय योजनाओं के माध्यम से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है और किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन एवं आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर बागवानी को अपनाने का आह्वान किया।

    दीनदयाल बिष्ट की सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। उनकी उपलब्धि प्रदेश के युवाओं और किसानों को यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और सतत परिश्रम के बल पर गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है तथा पलायन जैसी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

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