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    उत्तराखंड के लैंसडौन में गुलदार का आतंक बढ़ा, शाम ढलते ही सड़कों पर दहशत

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 09:21 PM (IST)

    लैंसडौन में गुलदार की बढ़ती सक्रियता से लोगों में दहशत है, शाम ढलते ही सड़कों पर गुलदार दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग को अभी तक सूचना नहीं मिली है। ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. लैंसडौन में शाम ढलते ही गुलदार की सक्रियता बढ़ी

    2. लोगों में दहशत, पैदल आवाजाही करने से कतरा रहे हैं

    3. वन विभाग रात्रि गश्त करेगा, बंदरों का आतंक भी जारी

    संवाद सहयोगी, लैंसडौन (पौड़ी)। पर्यटन नगरी लैंसडौन में गुलदार की बढ़ती सक्रियता से लोगों में दहशत है।

    शाम ढलते ही कैंट और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार दिखाई देने से लोग पैदल आवाजाही करने से कतराने लगे हैं।

    वहीं, लगातार गुलदार दिखाई देने के बावजूद वन विभाग को अब तक इसकी सूचना नहीं मिल पाई है।

    बीती शाम पूर्व छावनी परिषद सदस्य महिपाल सिंह रावत दोपहिया वाहन से भूल्ला लेक के समीप से अपने घर जा रहे थे। उनके साथ कैंट कर्मचारी बीरबल भी मौजूद थे।

    कैंट कार्यालय के समीप चढ़ाई पर अचानक उनके वाहन के सामने गुलदार आ गया। गुलदार को सामने देख दोनों घबरा गए। इसके बाद गढ़वाल मंडल विकास निगम के समीप भी कई लोगों ने गुलदार को देखा।

    इससे पूर्व कुली मोहल्ले में कई बार गुलदार दिखाई दे चुका है। सूबेदार मोहल्ले समेत अन्य क्षेत्रों में भी गुलदार की सक्रियता से लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

    बीते वर्ष पर्यटन नगरी से सटे गैयूं गांव में गुलदार ने एक मासूम को निवाला बना लिया था। लैंसडौन और आसपास के क्षेत्रों में कई लोगों पर गुलदार ने हमला भी किया था।

    बाद में वन विभाग ने गुलदार को पिंजरे में कैद कर रेस्क्यू किया था। वर्षाकाल शुरू होते ही एक बार फिर गुलदार की सक्रियता ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    वन क्षेत्राधिकारी राकेश चंद्र ने बताया कि क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता को लेकर अब तक किसी व्यक्ति ने विभाग को सूचना नहीं दी है। हालांकि, क्षेत्र में रात्रि गश्त कराई जाएगी।

    बंदरों के आतंक से भी लोग परेशान

    लैंसडौन में बंदरों और लंगूरों का उत्पात भी लगातार जारी है। कई मार्गों पर अकेले पैदल गुजरना जोखिम भरा साबित हो रहा है। बीते दिनों नगर में बंदरों के आधा दर्जन से अधिक लोगों को काटने के मामले सामने आ चुके हैं।

    स्थानीय लोग कई बार छावनी परिषद और वन विभाग का ध्यान समस्या की ओर आकृष्ट करा चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बंदरों को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई न होने से लोगों में रोष है।

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