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    भारत-चीन व्यापार पर संकट: चीन ने नहीं दी अनुमति, गुंजी से लौटे भारतीय व्यापारी

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 02:46 PM (IST)

    चीन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण गुंजी से धारचूला लौटे 25 भारतीय व्यापारी, जिससे भारत-चीन व्यापार फिर अधर में लटक गया है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ । कोरोना काल के बाद इस बार सात जुलाई से भारत-चीन व्यापार शुरू होना था। इसके लिए भारत की ओर से पिथौरागढ़ जिले के गुंजी में ट्रेड कार्यालय स्थापित हो चुका है। 134 भारतीय व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस भी जारी कर दिए गए हैं।

    व्यापारी गुड़, मिश्री, तंबाकू, मसाले, घी आदि सामान लेकर गुंजी पहुंच भी गए। लेकिन चीन में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने से व्यापारी अब वापस लौट रहे हैं। कुछ व्यापारी गुंजी में ही डेरा डाले हैं। चीन की ओर से कहा जा रहा है कि तकलाकोट मंडी में भारतीय व्यापारियों के लिए दुकान और गोदाम की व्यवस्था अभी पूरी नहीं हो पाई है।

    व्यापारी अब दोहरी चिंता में

    व्यवस्था होने के बाद ही भारत को सूचना दी जाएगी। ऐसे में व्यापारी अब दोहरी चिंता में हैं। एक ओर ट्रेड शुरू होने को लेकर संशय है तो दूसरी ओर पैक किया गया सामान भी खराब होने का डर है।

    छह साल बाद दो देशों के मध्य कारोबार शुरू होने की उम्मीद के बीच अब उत्साह धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है।
    उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रे से होने वाले इस व्यापार के लिए भारतीय व्यापारी पिछले एक माह से तैयारियों में जुटे थे। 30 व्यापारी अपना सामान लेकर जुलाई प्रथम सप्ताह में गुंजी पहुंच गए थे।

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    कस्टम, सीजीएसटी सहित तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद व्यापारियों को सात जुलाई को चीनी मंडी तकलाकोट के लिए रवाना होना था। इस बीच चीन की ओर से पिथौरागढ़ प्रशासन को अभी व्यापारियों को न भेजे जाने का संदेश प्राप्त हुआ। इसमें कहा गया था कि तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए पर्याप्त दुकान और गोदामों की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

    भारतीय व्यापारियों को उम्मीद थी कि जल्द ही चीन आने का संदेश मिल जाएगा, लेकिन 11 दिन बाद भी तकलाकोट जाने के लिए कोई पत्र या मेल चीन की ओर से नहीं आया है। गुंजी में डेरा डाले 25 व्यापारी मायूस होकर धारचूला लौट आए हैं। पांच व्यापारी गुंजी में रुके हुए हैं।

    व्यापारियों का कहना है कि नमी के कारण उनका सामान खराब होने लगा था। एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ रहा है। श्यांगशुंग नाले के पास रखे गए 70 से अधिक घोड़े -खच्चरों के लिए चारे की दिक्कत भी होने लगी है। भारत-चीन व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली ने कहा है कि भारतीय व्यापारी चीन पहुंच जाते तो अब तक अपना 40 प्रतिशत माल बेच चुके होते।

    प्रशासन विदेश मंत्रालय से वार्ता कर जल्द व्यापार शुरू कराए। दरअसल, सदियों से चल रहा भारतीय चीन व्यापार वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बंद हो गया था। वर्ष 1992 में व्यापार दोबारा शुरू हुआ। कोराना काल में व्यापार फिर बाधित हो गया। सात वर्ष बाद इस वर्ष फिर व्यापार की स्वीकृति मिली है।

    हमने संबंधित व्यापारियों की सूची चीन को भेज दी है। चीन से दुकानों व गोदामों की व्यवस्था होने का संदेश आते ही व्यापारी रवाना हो जाएंगे। - आशीष जोशी, ट्रेड अधिकारी व एसडीएम

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