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केदारनाथ में ‘कैरी मी बैक’ अभियान बना जन आंदोलन, अब तक दो टन कचरा गौरीकुंड ला चुके यात्री

Published: Fri, 19 Jun 2026 09:51 AM (IST)

केदारनाथ में जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा 'कैरी मी बैक' अभियान यात्रियों के सहयोग से सफल हो रहा है।

केदारनाथ धाम क्षेत्र से अब तक दो टन प्लास्टिक कचरा गौरीकुंड ला चुके हैं यात्री।

केदारनाथ धाम क्षेत्र से अब तक दो टन प्लास्टिक कचरा गौरीकुंड ला चुके हैं यात्री।

HighLights

  1. केदारनाथ में 'कैरी मी बैक' अभियान को यात्रियों का सहयोग।

  2. धाम से अब तक दो टन प्लास्टिक कचरा गौरीकुंड लाया गया।

  3. यह अभियान जनभागीदारी आधारित कचरा प्रबंधन का प्रभावी मॉडल।

संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। पर्यावरण संरक्षण और केदारनाथ धाम को स्वच्छ, सुंदर एवं कचरामुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग की ओर संचालित ‘कैरी मी बैक’ अभियान को यात्रियों का सहयोग मिल रहा है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक दो टन कचरा धाम क्षेत्र से गौरीकुंड लाया जा चुका है।

नगर पंचायत केदारनाथ, हीलिंग हिमालय फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत यात्रियों को अपने साथ ले जाए गए प्लास्टिक, पानी की खाली बोतल, खाद्य सामग्री के रैपर और अन्य गैर-जैविक कचरे को धाम में न छोड़कर वापस गौरीकुंड लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

यात्रा मार्ग और धाम क्षेत्र में तैनात कार्मिक व स्वयं सेवकों की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाकर यात्रियों को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा का कहना है कि ‘कैरी मी बैक’ अभियान जनभागीदारी आधारित कचरा प्रबंधन का एक प्रभावी माडल बनकर उभरा है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे अपने साथ ले जाए गए कचरे को वापस गौरीकुंड तक लाकर हिमालय की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

बदरीनाथ धाम में आय बढ़ा रहा कूड़ा प्रबंधन

बदरीनाथ धाम में नगर पंचायत कूड़े का निस्तारण कर अपनी आय बढ़ा रही है। यात्रा सीजन में रोजाना लगभग तीन टन कचरा निकल रहा है। मैटेरियल रिकवरी सेंटर के जरिये इसे गीले और सूखे कचरे में अलग किया जा रहा है।

गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है, जबकि प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर ब्लाक बनाए जा रहे हैं। जैविक कचरे के निस्तारण को आर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर और सूखे कचरे के लिए काम्पेक्टर मशीनें लगाई गई हैं। डोर-टू-डोर गाड़ियां और स्वच्छता कर्मचारियों की कूड़ा निस्तारण में मुख्य भूमिका है।

यमुनोत्री-गंगोत्री में कूड़ा प्रबंधन

गंगोत्री धाम का कूड़ा ढाई किमी दूर अखरोट खादर लाया जाता है। यहां नगर पंचायत के कंपोस्ट प्लांट में जैविक कचरे से खाद बनाई जाती है। हालांकि, कूड़ा निस्तारण को यहां वर्ष 2024 में दो करोड़ की लागत लगी ब्लेक होल मशीन शो-पीस बनी है। केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत लगाई गई यह मशीन मानकों की अनदेखी करने पर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आपत्ति के बाद बंद पड़ी है।

यमुनोत्री धाम में यात्रा सीजन के दौरान रोजाना 10 टन तक कूड़ा निकलता है। पांच किमी लंबे पैदल मार्ग और खाई में जगह-जगह प्लास्टिक का कचरा पड़ा रहता है। इसे जिला पंचायत के कर्मचारी इकट्ठा करते हैं और जानकीचट्टी में लगे सालिड मैनेजमेंट प्लांट में इसका निस्तारण किया जाता है।

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