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    धामी मंत्रिमंडल: बरसी बाबा केदार की कृपा, रुद्रप्रयाग के साधारण परिवार का बेटा बना मंत्री

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 12:05 PM (IST)

    रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी ने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर धामी मंत्रिमंडल में मंत्री पद हासिल किया है। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और जनसेवा का प्र ...और पढ़ें

    रुद्रप्रयाग से विधायक भरत सिंह चौधरी।

    रुद्रप्रयाग से विधायक भरत सिंह चौधरी।

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    जागरण संवाददाता, रुद्रप्रयाग। जनता में बेहतर छवि और जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए पहचान बनाने वाले रुद्रप्रयाग से विधायक भरत सिंह चौधरी ने साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर जीवन संघर्ष, समर्पण और निरंतर जनसेवा की मिसाल पेश की है। बाबा केदारनाथ की कृपा से उन्हें उत्तराखंड कैबिनेट में जगह मिली है।

    ग्रामीण पृष्ठभूमि से राजनीति तक का सफर

    वर्ष 1959 में तत्कालीन चमोली जिले के रानीगढ़ पट्टी के गडबू गांव में जन्मे भरत सिंह चौधरी के पिता स्वर्गीय सुबेदार छोटाण सिंह चौधरी थे। प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय घोलतीर से प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज गौचर से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज देहरादून से बीए-एलएलबी की डिग्री हासिल की।

    राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने छात्र जीवन से ही कर दी थी। वर्ष 1979 से 1982 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। इसके बाद वर्ष 1985 में साधन सहकारी समिति (मिनी बैंक) नगरासू के अध्यक्ष बने और 1988 में ग्राम पंचायत मरोड़ा के प्रधान निर्वाचित हुए।

    लगातार सक्रिय रहा राजनीतिक सफर

    वर्ष 1990 में जिला परिषद चमोली के सदस्य बने। इसके बाद उन्होंने 1993, 1996 और 2002 में कर्णप्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वर्ष 2003 में देवभूमि रचनात्मक सहकारी समिति लिमिटेड की स्थापना कर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

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    उत्तराखंड गठन के बाद नई पहचान

    उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2007 और 2012 में रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे। वर्ष 2013 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन को नई दिशा दी।

    वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में रुद्रप्रयाग सीट से करीब 30 हजार मत प्राप्त कर लगभग 15 हजार मतों से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर विधायक बने। इसके बाद 2022 में उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 30 हजार से अधिक मत प्राप्त कर दोबारा जीत दर्ज की।

    वर्तमान में अहम जिम्मेदारियां

    वर्तमान में वे उत्तराखंड विधानसभा की विभिन्न समितियों के सदस्य हैं और संस्कृत भाषा प्रोत्साहन समिति के सभापति के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

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