खैट पर्वत पर आमरण अनशन जारी: अनशनकारी अजय पंवार की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
टिहरी बांध प्रभावितों की मांगों को लेकर खैट पर्वत पर चल रहे आमरण अनशन के नौवें दिन अनशनकारी अजय पंवार की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया ...और पढ़ें

बांध प्रभावितों की मांगो लेकर खैट पर्वत पर आमरण अनशन पर बैठक आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण करती विभागीय की टीम। साभार: सागर भंडारी
HighLights
अनशनकारी अजय पंवार की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
टिहरी बांध प्रभावितों की निश्शुल्क बिजली-पानी की मुख्य मांग
12 प्रतिशत रायल्टी जनपद के विकास कार्यों में खर्च हो
संवाद सहयोगी, नई टिहरी। टिहरी बांध प्रभावितों को निश्शुल्क बिजली-पानी उपलब्ध कराने और टिहरी बांध से मिलने वाली 12 प्रतिशत रायल्टी को जनपद के विकास कार्यों में खर्च करने की मांग को लेकर खैट पर्वत पर आमरण अनशन पर बैठे अनशनकारी अजय पंवार की तबीयत बिगड़ गई। प्रशासन ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
शुक्रवार को नौवें दिन भी सागर भंडारी और गोपीनाथ सिंह रावत अनशन पर डटे हैं। इससे पहले अनशनकारी देवांक चमोली की तबीयत खराब होने पर भी उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की टीम ने खैट पर्वत पहुंचकर अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। टीम के सदस्य डा. अरविंद आर्य ने बताया कि अनशन के कारण आंदोलनकारियों के वजन में लगातार कमी आ रही है।
वहीं, सागर भंडारी का बीपी भी सामान्य से अधिक पाया गया। प्रशासन की ओर से राजस्व निरीक्षक विजय कुमार पटवाल ने आंदोलनकारियों से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की, लेकिन उन्होंने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय दोहराया।
राजस्व निरीक्षक विजय पटवाल ने बताया कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। अनशनकारियों का कहना है कि जब तक बांध प्रभावितों के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से वार्ता नहीं कराई जाती, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
अनशनकारी सागर भंडारी ने कहा कि बांध प्रभावितों के हक और अधिकारों की लड़ाई में आंदोलनकारी हर त्याग के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
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उन्होंने बताया कि पिछले तीन माह से अधिक समय से मातृशक्ति और क्षेत्रवासी बौराड़ी में क्रमिक धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते खैट पर्वत पर आमरण अनशन शुरू करने का निर्णय लिया गया।