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    उत्तराखंड: देवप्रयाग में अध्यापकों ने जान जोखिम में डालकर बुझाई 50 हेक्टेयर जंगल की आग

    Updated: Sat, 23 May 2026 06:38 PM (IST)

    केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, देवप्रयाग के अध्यापकों ने जान जोखिम में डालकर 50 हेक्टेयर जंगल में लगी आग बुझाई। इस दौरान कुछ अध्यापक घायल भी हुए और र ...और पढ़ें

    देवप्रयाग में नृसिंहाचल पर्वत के जंगलों में आग पर काबू पाने का प्रयास करते श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर के अध्यापक और वनकर्मी। जागरण

    देवप्रयाग में नृसिंहाचल पर्वत के जंगलों में आग पर काबू पाने का प्रयास करते श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर के अध्यापक और वनकर्मी। जागरण

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    संवाद सूत्र जागरण, देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के अध्यापकों ने जान जोखिम में डालकर करीब 50 हेक्टेयर जंगल में लगी आग को बुझाया। वनकर्मियों के साथ शाम छह बजे शुरू किया गया यह अभियान रात दस बजे तक चला।

    खड़ी पहाड़ी पर कठिन परिस्थितियों में चलाई गई इस मुहिम में कुछ अध्यापक फिसलन और कांटे चुभने से थोड़ा बहुत घायल भी हुए। देर रात रास्ता भटकने और उजाले की व्यवस्था न होने के कारण इन्हें परेशानियों का सामना भी करना पड़ा।

    अलकनंदा के बायें किनारे पर बसे केंद्रीय संस्कृत विवि के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में शुक्रवार अपराह्न लगभग चार बजे अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया, जब पौड़ी के सबदरखाल की ओर से लगी आग परिसर की ओर आने लगी।

    चीड़ के पेड़ों से उठती आग की लपटों और भारी धुएं से वातावरण घुटनभरा हो गया। परिसर प्रशासन ने इस संबंध में वन विभाग के पौड़ी कार्यालय को सूचना दी।

    devprayag forest fire spread

    वहां से दो फारेस्ट गार्ड भेजे गए, लेकिन नृसिंहाचल पर खड़ी चढ़ाई और ऊपर जाने का रास्ता न होने के कारण वनकर्मी असमंजस में पड़ गए।

    इस पर श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने आनन-फानन में परिसर और बालगुरुकुल के अध्यापकों की एक टीम बनाई और स्वयं टीम का नेतृत्व करते हुए खड़ी पहाड़ी पर चढ़कर मौके के लिए रवाना हुए।

    परिसर की लगभग 12 फुट ऊंची बाउंड्रीवाल को किसी तरह पार कर ये लोग लगभग डेढ़ घंटे में नृसिंह मंदिर के नीचे घटनास्थल पर पहुंचे। चीड़ की पत्तियों, बीजों, सूखी घास और हवा के कारण वहां आग भड़क रही थी।

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    वन विभाग के कर्मचारियों नरोत्तम प्रसाद और मुकेश नेगी ने पहले मोर्चा संभाला और अध्यापकों की टीम को अपने निर्देशन में कार्य करने को कहा। तीखे ढाल और चीड़ की सूखी पत्तियों की फिसलन के कारण आग पर नियंत्रण पाना बहुत कठिन हो रहा था।

    इस बीच अंधेरा होने लगा तो मुश्किल और बढ़ गई। पूरी टीम ने लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझा दी। इस दौरान फिसलने और कांटे चुंभने से कुछ अध्यापक घायल भी हो गए।

    टीम को घटनास्थल पर अनेक पक्षी जले और अधजली अवस्था में मिले। लगभग 50 हेक्टेयर जंगल में आग बुझाकर टीम ने राहत की सांस ली और इस प्रकार श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर को आग की चपेट में आने बचा लिया गया।

    बिना संसाधनों के किसी तरह यह आग तो बुझा ली गई, लेकिन इसके बाद अध्यापकों की टीम जंगल में रास्ता भटक गई। पानी की कमी और प्रकाश का अभाव होने के कारण एक कदम भी चलना मुश्किल हो गया।

    टीम ने खेड़ा गांव की ओर जाकर वहां शरण लेने का मन बनाया, लेकिन लगभग दो किमी चलने के बाद ये लोग रास्ता भटक गए। इसके बाद किसी तरह ये लोग रात लगभग 10 बजे तक परिसर में पहुंचे।

    टीम में डा. वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल, डा. सुरेश शर्मा, डा. सुखदेव सिंह, डा. प्रदीप कुमार, डा. सूर्यकांत चौबे, डा. रवींद्र उनियाल, करुण कुमार, दिगंबर रतूड़ी, सुनील गोदियाल और संपदा अधिकारी उमाकांत भट्ट शामिल रहे।

    पहले भी हो चुकी घटना

    वर्ष 2024 में भी परिसर के तीन ओर से भारी आग लग गई थी। परिसर के भवनों की छतों पर अग्निशमन यंत्रों से बड़ी मुश्किल से इस आग को बुझाया गया था, लेकिन फिर भी परिसर की बाउंड्रीवाल पर लगे बिजली के केबल आग की भेंट चढ़ गए थे। इससे परिसर को लगभग 30 लाख का नुकसान हुआ था।

    बनाया जाएगा 18 फुट चौड़ा मार्ग

    परिसर निदेशक प्रो. सुब्रह्मण्यम ने बताया कि दावानल की घटनाओं के दृष्टिगत अब परिसर की जंगल से लगती सीमा पर सीमेंट का लगभग 18 फुट चौड़ा मार्ग बनाया जाएगा। इससे परिसर में आग को आने से रोका जा सकेगा।

    अगले छह माह में हम प्रकृति के अनुकूल ऐसी व्यवस्थाएं करेंगे कि इस आपदा से सुरक्षित रह सकें।

    कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम के मार्गदर्शन में अध्यापकों की टीम ने साहसपूर्ण कार्य कर परिसर को दावानल के आगोश में आने से बचाया है। इस सराहनीय कार्य के लिए परिसर की यह टीम बधाई की पात्र है।

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