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    सीएम धामी का सख्त संदेश, बोले- उत्तराखंड में भूमि कानूनों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

    Updated: Mon, 25 May 2026 10:43 PM (IST)

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भूमि कानूनों के उल्लंघन, अतिक्रमण और वक्फ संपत्तियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लैंड जिहाद, लव जिहा ...और पढ़ें

    हल्द्वानी में आयोजित सोशल मीडिया मंथन विथ सीएम धामी कार्यक्रम में कंटेंट क्रिएटर्स, डिजिटल वालेंटियर्स एवं युवाओं के साथ संवाद करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण

    हल्द्वानी में आयोजित सोशल मीडिया मंथन विथ सीएम धामी कार्यक्रम में कंटेंट क्रिएटर्स, डिजिटल वालेंटियर्स एवं युवाओं के साथ संवाद करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण

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    जागरण संवाददाता, खटीमा (ऊधम सिंह नगर)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी जमीन, वक्फ संपत्तियों और भू-कानून के उल्लंघन के प्रति सख्त रुख अपनाते कहा कि अधिकारी भू-कानून का उल्लंघन कर खरीदी गई जमीनों की गहनता से जांच करें और दोष सिद्ध होने पर ऐसी भूमि को राज्य सरकार में निहित किया जाए।

    उन्होंने ग्राम सभाओं और अन्य सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने, वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के साथ ही उम्मीद पोर्टल पर दर्ज ब्योरे की नियमित जांच करने और राज्य में स्थित शत्रु संपत्तियों पर हुए कब्जों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए।

    हल्द्वानी में हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य में लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद व मतातंरण की साजिश करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की बात कही। उत्तराखंड में सभी की आस्था का सम्मान है, लेकिन कोई कानून से ऊपर नहीं है।

    सोमवार को खटीमा स्थित आवास से जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड के भूमि कानूनों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से आकर उत्तराखंड में रह रहे लोगों के शस्त्र लाइसेंसों की सघन जांच की जाए। आगामी मानसून को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता और निगरानी बढ़ाई जाए। प्रदेश में अनावश्यक बिजली कटौती किसी भी स्थिति में न की जाए और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा जाए।

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    हल्द्वानी में आयोजित सोशल मीडिया मंथन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ने देने की बात कही तो कुछ लोगों ने इसे धार्मिक विरोध के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। जबकि हमारी सरकार किसी भी धर्म, आस्था या पूजा-पद्धति के विरुद्ध नहीं है।

    सभी आस्थाओं का सम्मान है लेकिन संविधान और कानून व्यवस्था से ऊपर कोई नहीं है। इंटरनेट मीडिया को डिजिटल युद्धभूमि की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    ऐसे समय में इंटरनेट मीडिया वारियर्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इसलिए डिजिटल राष्ट्रदूत बनकर फेक नैरेटिव का तथ्यात्मक जवाब दें। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रहित, सकारात्मक चिंतन और उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य को लेकर सामूहिक मंथन का मंच है।

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