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    उत्तराखंड के महेश अग्रवाल की आपातकाल की दास्तां: 127 दिन जेल में बिताए, अब सम्मान की मांग

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 02:06 PM (IST)

    80 वर्षीय महेश चंद्र अग्रवाल आपातकाल के दौरान अपनी 127 दिन की जेल यात्रा को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे उन्हें काशीपुर में गिरफ्तार किया गया था। ...और पढ़ें

    त्रासदी की दास्तां सुनाते ही चमक उठती हैं 80 वर्षीय महेश की आंखें।

    त्रासदी की दास्तां सुनाते ही चमक उठती हैं 80 वर्षीय महेश की आंखें।

    HighLights

    1. महेश अग्रवाल ने आपातकाल के 127 दिन जेल में बिताए

    2. काशीपुर से 19 लोग आपातकाल में गिरफ्तार हुए थे

    3. लोकतंत्र सेनानियों को ताम्रपत्र देने की मांग की जा रही है

    गणेश पांडे, काशीपुर । आपातकाल को 51 बरस बीत गए। पांच दशक में बहुत कुछ बदला, लेकिन जब अतीत की तरफ देखता हूं तो लोकतंत्र बचाने की लड़ाई की उस समय की याद ताजा हो जाती है।

    कोतवाल रामचरण का हमारी दुकान पर आना। मैंने चाय पूछी तो कहने लगे चौराहे तक चलते हैं, चाय वहीं पिएंगे। बतियाते हुए वह कोतवाली ले गए। चाय हुई। बहुत देर बैठे हुए तो मैंने कहा कोतवाल साहब चलता हूं। कहां? आप हिरासत में हैं कहकर हवालात में डाल दिया गया।

    17 जुलाई 1975 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था

    मोहल्ला संज्ञान घास मंडी निवासी 80 वर्षीय महेश चंद्र अग्रवाल जब यह बताते हैं तो उनके आंखों की चमक निखर उठती है। मन में जोश भर आता है। खुली किताब की तरह हर वाकया सिलसिलेवार बताते चले जाते हैं जैसे दो-चार बरस पुरानी ही बात हो। अग्रवाल व उनके अन्य साथियों ने आपातकाल के विरोध में काशीपुर के छोटे नीम व कोतवाली रोड पर प्रदर्शन किया था। देश विरोधी साजिश रचने के आरोप में 17 जुलाई 1975 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

    127 दिन तक उन्हें हल्द्वानी और फिर नैनीताल जेल में रखा गया। हल्द्वानी से नैनीताल ले जाने के लिए बस में ठूंसा गया। जेल से कोर्ट आने-जाने के दौरान हाथ में हथकड़ी रहती और पैरों में बेड़ी डाली जाती थी। अग्रवाल बताते हैं वह व्यापारी परिवार से थे। दुकान बंद होने से परिवार का खर्च चलना मुश्किल हो गया था।

    जेल में किसी समय खाना मिलता था तो कभी पानी पीकर ही समय गुजारना पड़ा था। नवंबर माह में नैनीताल में अच्छी ठंड पड़ने लग जाती है। तब उन्हें रात गुजारने के लिए एक कंबल दिया गया था। सुशील अग्रवाल, रामलाल खुराना, लक्ष्मी नारायण कुशवाहा, हरिशंकर अग्रवाल, ओमप्रकाश अरोरा भी महेश अग्रवाल के साथ गिरफ्तार हुए थे। सभी लोकतंत्र सेनानियों को 14 नवंबर 1975 को जेल से छोड़ा गया था।

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    जिले से 21 लोग गए थे जेल

    महेश अग्रवाल के बेटे 58 वर्षीय आकाश गर्ग बताते हैं कि जब पिता को गिरफ्तार किया गया था वह सात वर्ष के थे। पिता के साथ दुकान पर बैठे हुए थे। तब की धुंधली यादें हैं।

    गर्ग ने बताया आपातकाल में ऊधमसिंह नगर जिले के 21 लोगों को बंदी बनाया गया था। इनमें 19 काशीपुर के थे। काशीपुर में वर्तमान में उनके पिता व अधिवक्ता कृष्ण कुमार अग्रवाल ही जीवित हैं। आवास विकास में रहने वाले केके अग्रवाल बताते हैं कि वह बहुत मुश्किल दौर था। सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों की जगह केवल जेल में थी।

    स्वतंत्रता सेनानियों की तरह मिलें ताम्रपत्र

    आपातकाल में जेल गए लोग व उसके स्वजन चाहते हैं कि स्वतंत्रता सेनानियों व राज्य आंदोलनकारियों की तरह लोकतंत्र बचाने के दौरान यातना सहने वालों को ताम्रपत्र दिए जाएं। ताकि आने वाली पीढ़ी अपने पूर्वजों के योगदान को समझ सकें व उससे प्रेरणा लें। प्रदेश में 18 सितंबर 2025 को उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान एक्ट प्रभावी हो गया लेकिन सम्मानपत्र अभी तक नहीं दिए गए हैं।

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