नूरजहां का आनंद लेंगे उत्तराखंडी, भारत के दुर्लभ और महंगे आमों में शामिल; एक आम की किमत 1500 रुपए
उत्तराखंड में जल्द ही दुर्लभ और महंगे नूरजहां आम का स्वाद मिलेगा। पंतनगर किसान मेले में मध्य प्रदेश से आए इस विशाल आम (3-4 किलो) ने सबका ध्यान खींचा। ...और पढ़ें

किसान मेले में नूरजहां किस्म के आम ने खींचा लोगों का ध्यान, तीन से पांच किलो तक है वजन. Jagran

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राजेश मिश्रा, पंतनगर। यदि आप आम के प्रेमी हैं, तो उत्तराखंड में नूरजहां किस्म के आम का स्वाद चखने का अवसर जल्द ही उपलब्ध होगा। इस विशेष वैरायटी का एक आम लगभग तीन से चार किलोग्राम तक का होता है, जिसे पूरा परिवार चाव से खा सकता है। पंतनगर किसान मेले में मध्य प्रदेश से आए इस आम ने किसानों और आम जनता का ध्यान आकर्षित किया है।
जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर में चार दिवसीय 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन शुक्रवार से शुरू हो चुका है। इस मेले में उन्नत बीजों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के औद्यानिक पौधे भी उपलब्ध हैं। इस बार मेले में मध्य प्रदेश में विकसित अफगानिस्तान के आम की वैरायटी नूरजहां भी प्रदर्शित की जा रही है।
नूरजहां आम भारत के सबसे दुर्लभ और महंगे आमों में से एक है, जो अपने विशाल आकार (3-4 किलोग्राम तक) और बेहतरीन स्वाद के लिए जाना जाता है। यह आम मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पाया जाता है और इसे आमों की रानी भी कहा जाता है।
नूरजहां आम की प्रमुख विशेषता इसका विशाल आकार, सुनहरा रंग और अनोखा स्वाद है। यह आम जून के शुरुआती हफ्तों में पकता है और इसकी विशेषता इसे हर मायने में असाधारण बनाती है। सदियों पहले, यह किस्म अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए भारत पहुंची और मध्य प्रदेश में इसे आदर्श स्थान मिला।
खबरें और भी
किच्छा के नर्सरी में ड्राफ्ट कर तैयार किया नूरजहां पौध
किच्छा के नर्सरी में नूरजहां आम के पौधे को किच्छा निवासी करण नर्सरी के स्वामी संदीप कुमार ने ड्राफ्टिंग और सीडिंग के जरिए तैयार किया है।
संदीप कुमार ने बताया कि यह आम बागवानी के लिए लाभदायक है और किसान इसे बड़ी मात्रा में लगाकर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।
मुख्य विशेषता
- नूरजहां आम की लंबाई लगभग आठ से 10 इंच होती है, इसका गूदा मलाईदार, मुलायम और मीठा होता है।
- पकने पर यह सुनहरे पीले रंग का हो जाता है और इसकी गुठली छोटी होती है, जिससे फल का अधिकांश भाग खाने योग्य होता है।
- इसकी कीमत 500 से 1500 रुपये प्रति पीस तक जा सकती है।
- दुर्भाग्यवश, अब इन पेड़ों की संख्या कम हो गई है, जिससे यह आम एक दुर्लभ प्रजाति बन गया है।
यह भी पढ़ें- पंतनगर में 119वां अखिल भारतीय किसान मेला शुरू, उन्नत बीज और कृषि नवाचारों पर जोर