सियासी रसूख के आगे नियम बौने! फर्जी सर्टीफिकेट के आरोपों के बीच पूर्व प्रधान के बेटे का एडमिशन
रुद्रपुर में आरटीई प्रवेश को लेकर दोहरा मापदंड सामने आया है, जहां एक मोबाइल व्यापारी के बच्चे का प्रवेश आय प्रमाण पत्र में गड़बड़ी के कारण निरस्त कर द ...और पढ़ें

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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए बनाई गई आरटीई व्यवस्था पर ही अब सवालों की परत चढ़ने लगी है। आरोप है कि जहां आम अभिभावकों के दस्तावेजों की छोटी-सी कमी पर प्रवेश निरस्त कर दिए जा रहे हैं।
वहीं राजनीतिक प्रभाव रखने वाले पूर्व प्रधान के बेटे के मामले में शिकायत और जांच के बावजूद प्रवेश जारी रखा गया। किच्छा बाईपास स्थित एक निजी स्कूल में आरटीई प्रवेश को लेकर उठे इस विवाद ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आय प्रमाण पत्र में गड़बड़ी
एक तरफ प्रशासन ने मोबाइल व्यापारी के बच्चे का आरटीई प्रवेश आय प्रमाण पत्र में गड़बड़ी पाए जाने के बाद निरस्त कर दिया, तो दूसरी तरफ ग्राम शिमला पिस्तौर के पूर्व प्रधान यामीन के बेटे के आय प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत लंबित होने के बावजूद नर्सरी में प्रवेश हो गया। यही दोहरा रवैया अब अभिभावकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्राम शिमला पिस्तौर के पूर्व प्रधान यामीन के बेटे का इस सत्र में किच्छा बाईपास स्थित एक निजी स्कूल में आरटीई के तहत नर्सरी कक्षा में प्रवेश हुआ है। प्रवेश के लिए लगाए गए आय प्रमाण पत्र की पात्रता पर सवाल हैं और प्रमाण पत्र की जांच पूरी नहीं हुई है।
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जब दस्तावेजों की सत्यता जांच के दायरे में थी तो प्रवेश प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाना चाहिए था। लेकिन प्रवेश हो जाने के बाद अब जांच की गति पर सवाल उठ रहे हैं।
एक बच्चे का प्रवेश रद्द, दूसरे पर फैसला नहीं
आरटीई प्रवेश में सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई की समानता को लेकर खड़ा हो गया है। प्रशासन ने एक मोबाइल व्यापारी के बच्चे का प्रवेश जांच के बाद निरस्त कर दिया। कारण बताया गया कि प्रस्तुत आय प्रमाण पत्र आरटीई पात्रता के मानकों पर खरा नहीं उतरा।
लेकिन पूर्व प्रधान के मामले में शिकायत और जांच लंबित होने के बावजूद अब तक कोई अंतिम कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दस्तावेजों की जांच के नियम सभी के लिए समान हैं या फिर रसूख के हिसाब से कार्रवाई की रफ्तार तय होती है?
दो माह से अटकी जांच, जिम्मेदार कौन?
गदरपुर क्षेत्र में आरटीई के कई आवेदनों की जांच करीब दो माह से अधर में लटकी हुई है। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से पात्र और अपात्र बच्चों की पहचान में देरी हो रही है।
अभिभावकों का आरोप है कि समय पर जांच नहीं होने से पूरी प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वहीं कुछ मामलों में तेजी और कुछ मामलों में देरी ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि अधिकांश प्रवेश हो चुके हैं।
पहली सूची में करीब पांच हजार बच्चों को मिला था प्रवेश
आरटीई के तहत जिले में जारी पहली सूची में करीब पांच हजार बच्चों का चयन हुआ था। चयन के बाद आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना था। इसी जांच प्रक्रिया में कई आवेदनों पर सवाल उठे। कुछ अभिभावकों ने दस्तावेजों को लेकर स्पष्टीकरण दिया तो कुछ मामलों में आवेदन वापस ले लिए गए।
निगरानी बढ़ी तो दो अभिभावकों ने वापस लिए आवेदन
आरटीई प्रवेश में दस्तावेजों की जांच और निगरानी बढ़ने के बाद दो अभिभावकों ने अपने आवेदन वापस ले लिए। अधिकारियों की सख्ती के बाद अब संदिग्ध दस्तावेजों वाले मामलों की जांच तेज करने की बात कही जा रही है।
आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार कराई जा रही है। जिन भी आवेदनों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उनकी जांच संबंधित स्तर से कराई जा रही है। किसी भी अभिभावक के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पात्रता के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि किसी आवेदन में आय प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - सावेद आलम, खंड शिक्षा अधिकारी
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