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    धराली आपदा का एक साल: आज के ही दिन खीर गंगा में आया था सैलाब, 30 सेकंड में उजड़ गया था पूरा कस्बा

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 02:32 PM (IST)

    धराली आपदा के एक साल बाद भी कस्बा अपने जख्मों को समेटे खामोश खड़ा है, जहां 5 अगस्त 2025 को खीरगंगा नदी में आए सैलाब ने भारी तबाही मचाई थी। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. खीरगंगा नदी में सैलाब से धराली में भारी तबाही हुई

    2. आपदा के एक साल बाद भी कस्बा खामोश, जख्म बरकरार

    3. पुनर्निर्माण जारी, पर कई प्रभावितों को मदद का इंतजार

    जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। तारीख पांच अगस्त, साल 2025। यह वह दिन था जब उत्तरकाशी जिले में खीरगंगा नदी में अचानक सैलाब आने से गंगोत्री हाईवे किनारे बसा धराली कस्बा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया था। विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही की तस्वीरों और वीडियो ने देश-दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। इस आपदा में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। 52 लोग लापता हुए थे। इनमें से अब तक 20 लोगों को मृतक घोषित किया गया है।

    आपदा से उजड़े घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। कभी गंगोत्री हाईवे के किनारे बसा धराली कस्बा गंगोत्री धाम की यात्रा का प्रमुख पड़ाव हुआ करता था, लेकिन वर्तमान में यह आपदा के जख्म समेटे खामोश खड़ा नजर आता है। कभी धराली कस्बा पहले जैसा होगा। इसकी उम्मीद भी अब कम ही नजर आती है।

    हालांकि मलबे से रास्ते निकले हैं तो उजड़े बाग फिर से संवर रहे हैं। जिंदगी दोबारा रफ्तार पकड़ रही है। स्थानीय लोगों की जीवटता, जिंदगी जीने की जंग और सरकार की ओर से किए जा रहे पुनर्निर्माण व विकास कार्यों के चलते धराली फिर से खड़ा होने का प्रयास कर रहा है। उत्तरकाशी से जागरण संवाददाता अजय कुमार की रिपोर्ट-

    पसरी है मलबे की चादर

    यूं तो धराली में श्रीकंठ पर्वत से निकलने वाली खीरगंगा नदी में बाढ़ आने का पुराना इतिहास रहा है, लेकिन इस नदी में कभी ऐसी विनाशकारी बाढ़ आएगी, जो धराली कस्बे के अस्तित्व को मिटाकर रख देगी, इसकी कल्पना कभी किसी ने नहीं की थी। गंगोत्री धाम की यात्रा का यह पड़ाव शीतकाल में होने वाली बर्फबारी के बाद भी गुलजार रहता था।

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    आज यह आपदा के जख्मों को मलबे की चादर में समेटे खामोश नजर आता है। चारधाम यात्रा के दौरान भी यहां सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि शासन व प्रशासन ने यहां आपदा प्रभावितों के पुनर्वास व आजीविका संवर्धन के लिए कुछ प्रयास किए हैं। लेकिन जो भी प्रयास अब तक हुए हैं, वह नाकाफी और प्रभावितों की उम्मीदों के अनुसार नहीं हैं। धरातल पर धराली की स्थिति में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

    आपदा के एक वर्ष बाद भी धराली की खामोशी और उसके जख्मों की गहराई को महसूस किया जा सकता है। यह एक ऐसा स्थान है, जहां जीवन की रफ्तार थम सी गई है और लोग अपने खोए हुए सपनों को फिर से जीने की कोशिश कर रहे हैं। धराली की इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या कभी यह क्षेत्र फिर से पहले जैसा हो पाएगा?

    आपदा से बदली परिस्थितियों के चलते स्थानीय लोगों की उम्मीदें अब न के बराबर हैं, लेकिन वे फिर भी अपने जीवन को पुनः संवारने की कोशिशों में लगे हुए हैं। तीन दिन पहले जब मैं धराली गया तो यहां आपदा में टूटे कुछ आवासीय व व्यावसायिक घरों का निर्माण होते नजर आया। इससे लगा कि आपदा ने लोगों के घरों को जरूर तोड़ा है, लेकिन उनका मनोबल नहीं।

    19 के आश्रितों को पांच लाख प्रति परिवार राहत

    आपदा में लापता हुए 52 लोगों में से अब तक 20 लोगों को मृतक घोषित किया गया है। इनमें से 19 के आश्रितों को पांच लाख प्रति परिवार राहत राशि बांटी गई। एक अन्य को राहत राशि बांटने की कार्यवाही गतिमान है। वहीं, शेष 32 को मृत घोषित करने के संबंध में उनके प्रदेश से समन्वय की कार्यवाही जारी है।

    डीएनए सैंपलिंग से हुई चार मृतकों की पहचान

    आपदा के बाद मृत मिले चार शवों की डीएनए सैंपलिंग से पहचान की गई, इसमें धराली का एक स्थानीय युवक तथा तीन सेना के जवान शामिल थे, जिनके आश्रितों को भी एसडीआरएफ मद से चार लाख व मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख सहित कुल पांच लाख की राहत राशि बांटी गई।

    29 भवन स्वामियों को अब भी मदद का इंतजार

    हर्षिल व धराली में कुल 116 व्यावसायिक होटल व दुकानें आपदा की जद में आए थे। इनमें से 86 होटल स्वामियों को पांच से 10 लाख रुपए के मध्य कुल 6.93 करोड़ रुपए मुआवजा बांटा गया। मुआवजा वितरण के दौरान पता चला कि 29 होटल व व्यावसायिक प्रतिष्ठान ऐसे थे, जो कि सरकारी भूमि पर निर्मित थे। इस कारण उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया, उन्हें अन्य सरकारी योजना से लाभान्वित करने का आश्वासन दिया गया है।

    सरकारी मदद से अपनी जमीन पर बना रहे घर

    आपदा के बाद प्रभावितों के पुर्नवास की बात कही गई थी, लेकिन यह पुनर्वास प्रभावितों की अपनी जमीन पर सरकारी मदद से भवन निर्माण तक सिमट गया है। प्रभावित 115 में से 21 प्रभावितों की भूमि का चिह्नीकरण कर प्रति परिवार कुल 4.88 लाख की दर से प्रथम किस्त के रुप में 2.32 लाख की आर्थिक मदद दी गई है। 66 प्रभावितों के भू-सर्वेक्षण के बाद प्रथम किस्त वितरित करने की कार्यवाही गतिमान है, जबकि अवशेष 28 में से 15 की भूमि के भू-सर्वेक्षण की कार्यवाही गतिमान है। वहीं, शेष 13 के भूमि चयन की कार्यवाही गतिमान है।

    आजीविका संवर्धन के नाम पर मिले तीन-तीन लाख

    आपदा प्रभावित धराली में 99 प्रभावितों को रीप परियोजना से आजीविका संवर्धन के नाम पर प्रति परिवार तीन लाख की मदद दी गई है। इसे लेकर भी प्रभावितों में असमंजस की स्थिति है। उनका है कि कई प्रभावितों को इससे वंचित रखा गया है।

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