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    एक छत के नीचे 22 भाषाएं, 9 डिजिटल गैलरियां... जानिए 'म्यूजियम ऑफ वर्ड' की खासियत

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 06:05 PM (IST)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में देश के पहले 'शब्द संग्रहालय' का उद्घाटन किया। यह संग्रहालय 22 भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा की हजारों वर्ष ...और पढ़ें

    कोलकाता में खुला देश का पहला शब्द संग्रहालय (फोटो-X)

    कोलकाता में खुला देश का पहला शब्द संग्रहालय (फोटो-X)

    HighLights

    1. अमित शाह ने कोलकाता में 'शब्द संग्रहालय' का उद्घाटन किया।

    2. यह भारत का पहला और अनूठा भाषा संग्रहालय है।

    3. 22 भारतीय भाषाओं की यात्रा आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित।

    राजीव कुमार झा, कोलकाता। देश की बहुभाषी विरासत, शब्दों की विकास यात्रा और ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अब एक ही छत के नीचे देखने का अवसर मिलेगा।

    कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित ऐतिहासिक बेल्वेडियर हाउस में नवनिर्मित देश के पहले व अनूठे शब्द संग्रहालय (म्यूजियम ऑफ वर्ड) का रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इसे देश में ही नहीं बल्कि विश्व में अपनी तरह का पहला अनूठा संग्रहालय माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2021 में परिकल्पना पर विकसित इस संग्रहालय में 22 भारतीय भाषाओं और शब्दों की हजारों वर्षों की यात्रा को नौ अत्याधुनिक डिजिटल गैलरियों और इंटरएक्टिव तकनीक के जरिए जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है

    भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य केवल भारतीय भाषाओं या साहित्य का इतिहास बताना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि भाषा ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के विकास में किस तरह केंद्रीय भूमिका निभाई। यह संग्रहालय 15 अगस्त तक आम लोगों के लिए नि:शुल्क खुला रहेगा।

    Amit Shah (18)

    भारतीय भाषाओं की हजारों वर्षों की यात्रा एक छत के नीचे

    संग्रहालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह संग्रहालय केवल साहित्य तक सीमित नहीं है। इसमें भाषा की वैश्विक यात्रा, विभिन्न सभ्यताओं के बीच उसके सेतु बनने और ज्ञान के आदान-प्रदान की कहानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत की गई है।

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    पूरी तरह डिजिटाइज्ड संग्रहालय में नौ थीम आधारित गैलरियां हैं, जिनमें भारतीय भाषाओं और लिपियों का विकास, प्राचीन पांडुलिपियां, मुद्रण परंपरा, ज्ञान-विज्ञान, मौखिक परंपराएं और भारत में ग्रंथालय संस्कृति के विकास को इंटरएक्टिव तरीके से दर्शाया गया है।

    एक विशेष गैलरी राष्ट्रीय पुस्तकालय के इतिहास और उसके योगदान को समर्पित है। यह परियोजना राष्ट्रीय पुस्तकालय और संस्कृति मंत्रालय के अधीन नेशनल काउंसिल आफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) के संयुक्त प्रयास से तैयार हुई है।

    राष्ट्रीय पुस्तकालय ने शोध सामग्री और ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध कराए, जबकि साइंस म्यूजियम ने तकनीकी डिजाइन और डिजिटल प्रस्तुति विकसित की है।

    उद्घाटन समारोह में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता, पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल और भारतीय आसूचना ब्यूरो (आइबी) के निदेशक महेश दीक्षित सहित अन्य विशिष्ट लोग उपस्थित रहे।

    फिलहाल शब्द संग्रहालय के पहले चरण का उद्घाटन हुआ है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 41 करोड़ रुपये है। इसका प्रथम चरण पूरा हो चुका है, जिसमें 14 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। दूसरे और तीसरे चरण पर तेजी से काम चल रहा है।

    Museum of word in Kolkata (1)

    एक क्लिक पर स्क्रीन पर स्वतः दिखाई देने लगती है जानकारी

    अधिकारियों के अनुसार, संग्रहालय की सबसे आकर्षक 'नवरस गैलरी' है, जहां होलोग्राफी तकनीक का उपयोग किया गया है। किसी भी रस का चयन करते ही सामने बना मंच जीवंत हो उठता है और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति वास्तविक अनुभव का अहसास कराती है।

    बच्चों और युवाओं के लिए आरएफआइडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित इंटरएक्टिव प्रणाली भी विकसित की गई है। किसी पुस्तक को विशेष रीडर पर रखते ही उससे जुड़ी जानकारी और डिजिटल सामग्री स्क्रीन पर स्वतः दिखाई देने लगती है।

    पीएम मोदी की परिकल्पना को मिला आकार

    राष्ट्रीय पुस्तकालय के लाइब्रेरियन एवं सूचना अधिकारी पीएस दास ने बताया कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय पुस्तकालय दौरे के दौरान इस संग्रहालय की परिकल्पना की थी। उसी सोच को संस्कृति मंत्रालय ने साकार किया है।

    इसका मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध बहुभाषी विरासत को न केवल संरक्षित करना है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषाई जड़ों और ज्ञान-परंपरा से परिचित कराना भी है।

    पीएस दास ने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य 22 भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति, विकास और सांस्कृतिक योगदान को एक मंच पर लाना है। उनके अनुसार यह केवल भाषाओं का संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा की भी डिजिटल प्रस्तुति है।

    क्यों खास है 'म्यूजियम ऑफ वर्ड'?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह संग्रहालय आगामी दिनों में केवल पर्यटन का नया आकर्षण नहीं होगा, बल्कि भारतीय भाषाओं, साहित्य और ज्ञान परंपरा के अध्ययन का राष्ट्रीय केंद्र भी बनेगा। नई पीढ़ी को भारतीय भाषाओं से जोड़ने और देश की भाषाई धरोहर के संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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