अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय की मुश्किलें बढ़ीं, कलकत्ता हाई कोर्ट ने ठुकराई तत्काल सुनवाई की मांग
अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित राय की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दो नए मामलों में तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी है। ...और पढ़ें
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अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय की गिरफ्तारी की तलवार लटकी (फाइल फोटो)
HighLights
सुमित राय की दो नए मामलों में तत्काल सुनवाई खारिज।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
सुप्रीम कोर्ट से जमीन मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के व्यक्तिगत सहायक(पीए) सुमित राय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं।
उनके खिलाफ दो और मामलों में गिरफ्तारी की आशंका के चलते कलकत्ता हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन शुक्रवार को अदालत ने इसे खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि मामले की सुनवाई निर्धारित सूची के अनुसार ही होगी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने ठुकराई तत्काल सुनवाई की मांग
सुमित की ओर से अदालत को बताया गया कि उनके खिलाफ चार और एफआइआर दर्ज की गई हैं। इससे पहले दो एफआइआर में उन्हें अग्रिम जमानत मिल चुकी है। गुरुवार को जमीन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें फिलहाल गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक इस मामले में पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
जमीन मामले में ही सुमित पहले कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि नौकरी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में उन्हें सशर्त अग्रिम जमानत मिली थी।
हाई कोर्ट ने उन्हें 10 दिनों के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था और भविष्य में बुलाए जाने पर भी जांच में सहयोग करने को कहा था।
इस बीच पुलिस कई मामलों के सिलसिले में सुमित की तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार, उनके विभिन्न बताए गए पतों पर तलाश के बावजूद उनका पता नहीं चला।
इसके बाद मेदिनीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया था। वारंट के बाद सुमित ने वकील के माध्यम से अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया।
वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब नए मामलों में तत्काल सुनवाई की मांग भी खारिज होने से उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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