किसी ने फैशन जगत से शुरू किया करियर, कोई छात्र जीवन में RSS से जुड़ा; सुवेंदु के मंत्रियों की पूरी डिटेल
सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमि ...और पढ़ें

सुवेंदु अधिकारी के नए मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों का विस्तृत परिचय

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता । ममता बनर्जी के अपराजेय होने के मिथक को दो बार तोड़ने वाले सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के नौवें और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी। राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु और पांच मंत्रियों को शपथ दिलाई।
1. दिलीप घोष
दिलीप घोष बंगाल भाजपा का वह चेहरा हैं, जिन्होंने राज्य में संगठन को खड़ा किया। 1 अगस्त, 1964 को झाड़ग्राम के कुलियाना में जन्मे दिलीप छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे। 1990 के दशक में प्रचारक बनकर बंगाल में गांव-गांव घूमे।
2015 में जब वह पहली बार बंगाल भाजपा के अध्यक्ष बने थे, तब यहां पार्टी के मात्र तीन विधायक थे। उनके नेतृत्व में 2016 से 2021 के बीच संगठन का जमीनी स्तर पर विस्तार हुआ।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को 'पोलिंग बूथ जीतना है' का मंत्र दिया। 2016 में खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा और जीते। 2019 के लोकसभा चुनाव में मेदिनीपुर से जीतकर संसद पहुंचे। हालिया संपन्न विधानसभा चुनाव जीतकर अब उन्होंने मंत्रिपद संभाला है। बंगाल में दिलीप घोष द्वारा शुरू किया गया 'चाय पे चर्चा' नामक राजनीतिक अभियान काफी सफल रहा था।
2. अग्निमित्रा पाल
फैशन डिजाइनर से बंगाल भाजपा की सबसे मुखर नेत्रीफैशन डिजाइनर से बंगाल भाजपा की सबसे मुखर नेत्री और अब राज्य की मंत्री। अग्निमित्रा पाल की पहचान सड़क से विधानसभा तक उनकी आक्रामक शैली रही है। 25 नवंबर, 1974 को आसनसोल में जन्मीं अग्निमित्रा ने पहले फैशन जगत में पहचान बनाई, फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रभावित होकर राजनीति का रूख किया।
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2019 में भाजपा में शामिल हुईं। 2020 में उन्हें बंगाल भाजपा की महिला मोर्चा का दायित्व सौंपा गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में आसनसोल दक्षिण से जीतकर पहली बार विधायक बनीं। संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न व आरजी कर अस्पताल में डाक्टर से दुष्कर्म व हत्या की घटना जैसे मुद्दों पर उनका आक्रामक अंदाज चर्चा में रहा। पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुईं।
3. अशोक कीर्तनिया
मतुआ समुदाय की आवाजअशोक कीर्तनिया बांग्लादेश के हिंदू शरणार्थी मतुआ समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। वे उत्तर 24 परगना जिले के भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में भाजपा के जमीनी संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। कीर्तनिया लंबे समय से मतुआ समुदाय के धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं।
मतुआ समुदाय बंगाल की आबादी का करीब 17 प्रतिशत है। बनगांव उत्तर सीट से लगातार दो बार विधायक चुने गए कीर्तनिया विपक्ष में रहते भी बंगाल विधानसभा में मतुआ समुदाय के कल्याण व सीमावर्ती इलाकों के विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। वह भीड़ जुटाने के बजाय बूथ स्तर पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। मतुआ समुदाय में उन्हें 'हमारा आदमी' की तरह मान्यता है।
4- निशिथ प्रमाणिक
सहायक शिक्षक से बन गए मंत्रीनिशिथ प्रमाणिक छात्र राजनीति से उभरे नेता हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े, फिर 2019 में भाजपा में शामिल हो गए। उससे पहले काफी समय एक स्कूल में सहायक शिक्षक के तौर पर पढ़ाया। 17 जनवरी, 1986 को कूचबिहार के दिनहाटा में जन्मे निशिथ ने कूचबिहार सीट से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद निर्वाचित हुए।
वर्ष 2021 में मात्र 35 वर्ष की उम्र में मोदी सरकार में सबसे युवा मंत्री बने। उन्हें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बनाया गया। निशिथ की ताकत राजबंशी समुदाय और उत्तर बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में मजबूत पकड़ है। हालिया संपन्न विधानसभा चुनाव में उत्तर बंगाल की कई सीटें जिताने में उनकी अहम भूमिका रही है।
5- खुदीराम टुडु
आदिवासी समुदाय की नई उम्मीदबंगाल में नवगठित भाजपा सरकार में मंत्री बने खुदीराम टुडु जंगलमहल के आदिवासी समुदाय के लिए उम्मीद की नई किरण बन गए हैं। बांकुड़ा जिले के रानीबांध सीट से भारी वोटों से जीतकर आए खुदीराम राज्य में भाजपा का प्रमुख आदिवासी चेहरा है। उनकी पहचान आदिवासी समुदाय के अधिकारों व उनकी समस्याओं को राजनीतिक मंच पर उठाने वाले नेता के रूप में रही है।
भाजपा ने उन्हें मंत्री बनाकर साफ संदेश दिया है कि जंगलमहल और आदिवासी समुदाय उनकी पार्टी की प्राथमिकता में हैं। साफ-सुथरी ईमानदार नेता की छवि, शांत स्वभाव और जमीनी जुड़ाव के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं में उनकी व्यापक स्वीकार्यता है। टुड़ु भी राजनीति में आने से पहले स्कूल शिक्षक थे।