चंद्रिमा भट्टाचार्य को एक महीने पहले ही ममता बनर्जी ने बनाया था पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष, फिर क्यों दे दिया इस्तीफा?
ममता बनर्जी ने एक महीने पहले ही चंद्रिमा भट्टाचार्य को टीएमसी बंगाल अध्यक्ष बनाया था, लेकिन अब उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। ...और पढ़ें

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ (फोटो-पीटीआई)
HighLights
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टीएमसी बंगाल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।
ममता बनर्जी ने एक महीने पहले ही उन्हें इस पद पर नियुक्त किया था।
वह अब बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हो गईं।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद से ममता बनर्जी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। ममता बनर्जी जिस तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो कही जाती थी, आज वो ही ममता अपनी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के लिए लड़ रही हैं।
ममता बनर्जी का साथ एक-एक करके पार्टी के कई नेता छोड़ते जा रहे हैं। यहां तक कि ममता बनर्जी ने जहां चंद्रिमा भट्टाचार्य को एक महीने पहले तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया था, उन्होंने भी ममता का साथ छोड़ दिया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ
ममता बनर्जी ने 3 जून को पार्टी की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था और संगठन का पुनर्गठन किया था। उसी दौरान ममता ने सुब्रता बख्शी की जगह चंद्रिमा भट्टाचार्य को TMC बंगाल अध्यक्ष पद पर बैठाया था।
वहीं चंद्रिमा भट्टाचार्य को इसके ठीक एक महीने बाद बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चैंबर में बागी गुट के साथ बैठकर मुस्कुराते हुए देखा गया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आज शानिवार, 4 जुलाई को पद से इस्तीफा देने के बाद कहा, 'जहां भरोसा न हो, जहां विश्वास न हो, वहां काम करना मुमकिन नहीं है। इसीलिए हमने इस्तीफा दिया।'
चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से ममता बनर्जी की सबसे करीबी सहयोगियों में से एक मानी जाती रही हैं और तृणमूल सरकार में वित्त, स्वास्थ्य, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुकी हैं, लेकिन आज उन्होंने भी ममता का साथ छोड़ने का फैसला ले लिया।
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ऋतब्रत बनर्जी गुट में शामिल हुईं चंद्रिमा भट्टाचार्य
पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी गुट के कमरे में गईं। ऋतब्रत बनर्जी ने ही ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत शुरू की थी और अब वे बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।
चंद्रिमा भट्टाचार्य से पहले ममता बनर्जी की एक और करीबी सहयोगी काकोली घोष दस्तीदार ने कई पार्टी सांसदों के साथ बगावत का नेतृत्व करते हुए ममता बनर्जी का साथ छोड़ा था।
भट्टाचार्य का यह कदम पार्टी सांसद सायनी घोष जैसा ही है, जो ममता बनर्जी द्वारा तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा का प्रमुख फिर से बनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद बागी गुट में शामिल हो गईं।
भट्टाचार्य के इस्तीफा देने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए, ममता बनर्जी खेमे के विधायक कुणाल घोष ने पूछा कि उन्होंने तब इस्तीफा क्यों नहीं दिया जब वे ममता बनर्जी की सरकार के दौरान मिले अहम विभागों का मजा ले रही थीं।
तृणमूल कांग्रेस इस समय अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है क्योंकि विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर बगावत का दौर जारी है।
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