वो 6 कारण जिनसे ममता को भवानीपुर में मिली हार... सुवेंदु ने कैसे दी शिकस्त?
ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर सुवेंदु अधिकारी से मिली हार के 6 प्रमुख कारण बताए गए हैं। इसमें सत्ता विरोधी लहर, सुवेंदु का सीधा मुकाबला, वोट शेयर में ...और पढ़ें
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सुवेंदु अधिकारी ने ममता को कैसे हराया?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बंगाल में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। इस बार बीजेपी ने बंगाल में ऐसी सीटों पर जीत दर्ज की है, जहां से टीएमसी जीतती आ रही है। इन सीटों में सबसे अहम सीट भवानीपुर रहा। जहां भाजपा दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी है।
कभी टीएमसी के गढ़ माने वाली इस सीट पर ममता बनर्जी की हार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आइए उन 6 प्रमुख कारणों के बारे में जानते हैं, जिनके कारण ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा।
1. सत्ता विरोधी लहर
इस सीट पर ममता बनर्जी के हार की अहम सत्ता विरोधी लहर को माना जा रहा है, क्योंकि- जब सरकार को तीव्र सत्ता-विरोधी लहर का सामना करना पड़ता है, तो सुरक्षित सीटें भी अपनी सुरक्षित स्थिति खो बैठती हैं।
2. सुवेंदु अधिकारी
बंगाल में बीजेपी ने भले ही ममता बनर्जी के खिलाफ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा न की हो, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी को उनके गढ़ में चुनौती देने का निर्देश दिया। पिछले चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को चुनाव हरा चुके हैं, ऐसे में इससे भाजपा के पक्ष में माहौल बन गया और सुवेंदु ने ममता को हरा दिया।
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3. वोट शेयर
भवानीपुर विधानसभा में ममता बनर्जी का वोट शेयर पहले से बहुत अधिक गिर गया। जो वोट शेयर 2021 में 72 प्रतिशत था, वह 2026 में घटकर 42 प्रतिशत रह गया। एक ओर यहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में स्ट्रांगरूम और गली-मोहल्ले के प्रचार अभियानों में कड़ी टक्कर के चलते भाजपा ने यहां जमीनी स्तर पर पकड़ बना ली, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी पूरे बंगाल में अपने पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रही थीं और बीजेपी की तरह भवानीपुर में पकड़ नहीं बना पाईं।
4. भाजपा का चुनाव प्रचार
भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार को टीएमसी के भय के विरुद्ध के रूप में पेश किया, जो उसके लिए रामबाण साबित हुआ। भाजपा के प्रचार में सबसे खास बात यह रहा कि उसने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए, बल्कि बंगाल के लिए अपना विकल्प और दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और टीएमसी द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और धमकी भरे माहौल की आवश्यकता पर खुलकर चर्चा की। पार्टी के निचले स्तर के नेताओं ने पार्टी के नाम का दुरुपयोग किया, जिसका गुस्सा भी लोगों में देखने को मिला।
5. एसआईआर का इफेक्ट
बंगाल में चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रकिया के तह फर्जी मतदाताओं के नाम काट दिए। साथ ही चुनाव में धांधली और मतदाता हेरफेर पर रोक लगा दी गई, जिसने अतीत में बंगाल में हर सत्ताधारी सरकार, चाहे वह वामपंथी हो या तृणमूल कांग्रेस, को फायदा पहुंचाया था। टीएमसी द्वारा किए दावे के अनुसार भवानीपुर विधानसभा में बड़े पैमाने पर मतदाता हटाए जाने से मुकाबला और भी कड़ा हो गया।
6.आर.जी.कार का प्रभाव
आर.जी.कार बलात्कार और हत्या मामले के बाद बंगाल में यह पहला चुनाव है। भाजपा ने रणनीतिक रूप से पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को टीएमसी के खिलाफ पनिहाटी सीट से मैदान में उतारा, इससे टीएमसी के खिलाफ माहौल बन गया और पनिहाटी सीट से बीजेपी के रत्ना देबनाथ ने शानदार जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों से हरा दिया।