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    'किसी को बख्शा नहीं जाएगा', अम्फान घोटाले पर शुभेंदु अधिकारी की वॉर्निंग; बोले- खुलेगी पूरी फाइल

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 07:36 PM (IST)

    शुभेंदु अधिकारी सरकार 25 जुलाई को विधानसभा में अम्फान चक्रवात राहत घोटाले पर सीएजी रिपोर्ट पेश करेगी। ...और पढ़ें

    अम्फान घोटाले पर बोले शुभेंदु अधिकारी (फोटो-एएनआइ)

    अम्फान घोटाले पर बोले शुभेंदु अधिकारी (फोटो-एएनआइ)

    HighLights

    1. 25 जुलाई को विधानसभा में पेश होगी अम्फान घोटाले की सीएजी रिपोर्ट।

    2. घोटालेबाजों पर एफआईआर दर्ज कराने की राज्यपाल से होगी सिफारिश।

    3. पिछली सरकार ने 3,750 करोड़ के राहत घोटाले की रिपोर्ट दबाई थी।

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में हुए 'अम्फान चक्रवात राहत घोटाले' पर वर्तमान शुभेंदु अधिकारी सरकार शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा में घोषणा की कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की विशेष रिपोर्ट आगामी 25 जुलाई को सदन के पटल पर रखी जाएगी।

    शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि घोटाले में शामिल चाहे कितना भी बड़ा नेता या पूर्व मंत्री क्यों न हो, किसी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ एफआइआर दर्ज कराने के लिए राज्यपाल से सिफारिश की जाएगी।

    पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं पेश की कैग रिपोर्ट

    गृह विभाग के बजट पर चर्चा का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार ने संवैधानिक व्यवस्था के बावजूद कैग रिपोर्ट को न तो विधानसभा में रखा और न ही उस पर चर्चा कराई। वर्ष 2020 में आए भीषण चक्रवात अम्फान के बाद केंद्र सरकार ने दो किस्तों में 3,750 करोड़ रुपये की राहत राशि भेजी थी।

    आरोप है कि यह राशि वास्तविक पीड़ितों तक पहुंचने के बजाय बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीएजी ने इसकी विशेष जांच की थी, लेकिन पिछली सरकार ने इस रिपोर्ट को दबाए रखा और कभी सदन में पेश नहीं किया।

    शुभेंदु सरकार अब इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर अगले सत्र में विस्तृत चर्चा कराने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से सीधे तौर पर डायमंड हार्बर से पूर्व सांसद अभिषेक बनर्जी और उनके करीबी नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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    अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी राजनीतिक हैसियत को ढाल नहीं बनने देगी। चाहे वह पूर्व मुख्यमंत्री हो, पूर्व मंत्री हो या कितना भी बड़ा नेता, यदि कैग रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का उल्लेख होगा तो उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की अनुशंसा की जाएगी। कानून सभी के लिए समान है।

    विपक्ष ने बताया प्रतिशोध की राजनीति

    हालांकि मुख्यमंत्री के इस एलान पर विपक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में कैग की किसी रिपोर्ट में सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं के नाम सामने आते हैं तो क्या उनके खिलाफ भी समान कार्रवाई होगी।

    वहीं राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि अम्फान राहत घोटाले की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद राज्य की राजनीति में नया टकराव देखने को मिल सकता है।

    संवैधनिक संस्थाओं को फिर किया जा रहा है सक्रिय

    इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जा चुका है।

    रिपोर्ट मिलते ही विशेष सत्र बुलाकर उस पर भी निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार ने मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग और एससी/एसटी आयोग जैसी सभी संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय कर दिया था।

    शुभेंदु सरकार ने एलान किया है कि आगामी एक अगस्त से ये सभी संस्थाएं पुन: पूरी सक्रियता के साथ जनशिकायतों पर कार्रवाई करेंगी।

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