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    '24 घंटे तक बिना खाना-पानी के रखा', US में 35 साल से रह रही भारतीय महिला को ICE ने हिरासत में लिया

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 07:15 PM (IST)

    भारतीय मूल की मीनू बत्रा, जो 35 साल से अमेरिका में रह रही हैं, उन्हें इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। टेक्सास में दुभाषिया के रूप में क ...और पढ़ें

    35 साल से अमेरिका में रह रही भारतीय मूल की महिला हुआ अपराधी जैसा बर्ताव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

    35 साल से अमेरिका में रह रही भारतीय मूल की महिला हुआ अपराधी जैसा बर्ताव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में पिछले 35 साल से रह रही भारतीय मूल की महिला मीनू बत्रा को इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि महिला के पास वैध दस्तावेज होने का दावा किया जा रहा है। मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है और उनकी हिरासत को चुनौती दी गई है।

    मीनू बत्रा, जिनकी उम्र 53 वर्ष है, टेक्सास में इमिग्रेशन कोर्ट के लिए पंजाबी, हिंदी और उर्दू की लाइसेंस प्राप्त दुभाषिया हैं। वह कई सालों से सैकड़ों लोगों की कानूनी मामलों में मदद करती रही हैं।

    उन्हें 17 मार्च को हार्लिंजेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह एक केस के सिलसिले में मिलवॉकी जा रही थीं। ICE अधिकारियों ने उन्हें रोका, हथकड़ी लगाई और बाद में रेमंडविल स्थित एल वल्ले डिटेंशन सेंटर भेज दिया।

    कैसे हुई गिरफ्तारी?

    जेल से बातचीत में मीनू बत्रा ने अपनी हिरासत को 'अजीब और समझ से परे' बताया। उन्होंने कहा कि उनके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया गया और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उन्हें क्यों रोका गया है। उन्होंने बताया कि वह कई बार यह समझाने की कोशिश करती रहीं कि उनके पास वैध स्टेटस और काम करने की अनुमति है, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।

    मीनू ने कहा कि उन्हें डर है कि उन्हें ऐसे देश भेजा जा सकता है, जहां वह कभी नहीं रहीं। उनका कहना है कि वह बस दीवार को देखती रहती हैं और सोचती हैं कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है।

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    24 घंटे बिना खाना-पानी, अपमान का आरोप

    मीनू बत्रा ने अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें 24 घंटे तक न खाना दिया गया और न ही पानी। यहां तक कि उन्हें दवाइयां भी नहीं दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने उनसे हाथ पीछे करके फोटो खिंचवाई, जिससे ऐसा लगे कि वह हथकड़ी में हैं।

    मीनू के अनुसार, उन्हें बताया गया कि ये तस्वीरें 'सोशल मीडिया' के लिए हैं। इस घटना ने उन्हें अपमानित महसूस कराया और उन्होंने कहा कि उनके साथ एक अपराधी जैसा व्यवहार किया गया।

    डिपोर्टेशन का खतरा

    मीनू बत्रा 1991 में अमेरिका आई थीं, जब 1984 की सिख विरोधी हिंसा में उनके माता-पिता की मौत हो गई थी। तब से वह अमेरिका में रह रही हैं और अपने चार बच्चों की परवरिश यहीं की है। उनका बेटा हाल ही में अमेरिकी सेना में शामिल हुआ है। उनके वकील दीपक अहलूवालिया के मुताबिक, साल 2000 में अदालत ने उन्हें भारत भेजे जाने से रोक दिया था, क्योंकि वहां उनके साथ उत्पीड़न का खतरा था।

    अब वकील को आशंका है कि सरकार उन्हें किसी तीसरे देश भेज सकती है, क्योंकि एक महीने बाद भी यह साफ नहीं किया गया कि उन्हें कहां भेजा जाएगा। यही कारण है कि मीनू बत्रा ने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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