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    ईरान युद्ध में 6 अमेरिकी विमान ढेर, ट्रंप पर बढ़ता दबाव; लापता पायलट की तलाश तेज

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 10:42 PM (IST)

    ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है, जिसमें छह अमेरिकी विमान नष्ट हो गए और एक पायलट लापता है। यह घटना राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक ...और पढ़ें

    ईरान युद्ध में 6 अमेरिकी विमान ढेर ट्रंप पर बढ़ता दबाव (फाइल फोटो)

    ईरान युद्ध में 6 अमेरिकी विमान ढेर ट्रंप पर बढ़ता दबाव (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। कम से कम छह अमेरिकी विमान खोने और एक पायलट के लापता होने की घटना अब सिर्फ सैन्य मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गई है।

    ट्रंप ने हमेशा खुद को मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में पेश किया है, ऐसे में यह घटना उनकी छवि पर असर डाल सकती है। पेंटागन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दुश्मन इलाके के अंदर एक खतरनाक बचाव अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लापता पायलट को सुरक्षित निकाला जा सके। यह मिशन सिर्फ एक सैनिक को बचाने का नहीं, बल्कि अमेरिका की साख से भी जुड़ा हुआ है।

    ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका के कई विमान गिरने से रक्षा विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ गई है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अमेरिका इस युद्ध को लंबे समय तक जारी रख पाएगा।

    बढ़ते नुकसान और खतरे

    इस हफ्ते ही एक एफ-15ई लड़ाकू विमान और ए-10 अटैक विमान खो गए। इसके अलावा कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ की घटना में एक अवाक्स विमान और तीन अन्य एफ-15 भी नष्ट हो गए। एक पायलट को बचा लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है।

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    अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ए-10 विमान के पायलट ने विमान को कुवैत की सीमा तक ले जाकर इजेक्ट किया और बाद में उसे बचा लिया गया। वहीं, बचाव अभियान में लगे दो हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान की ओर से हमला हुआ, जिसमें कुछ जवान घायल हो गए।

    ट्रंप ने इस पूरे मामले पर सीधे कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर कड़े संदेश जरूर दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    राजनीतिक दबाव

    डोनल्ड ट्रंप लंबे समय से अपने पूर्व राष्ट्रपति जैसे जिमी कार्टर, जो बाइडन, जॉर्ज बुश और बराक ओबामा की विदेश नीति की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने ईरान बंधक संकट और अफगानिस्तान से वापसी जैसे मुद्दों को “कमजोर नेतृत्व” के उदाहरण के रूप में पेश किया है।

    अब मौजूदा स्थिति को उनके विरोधी उसी नजर से देख रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह की स्थिति से बचने का दावा ट्रंप करते थे, अब वही हालात उनके सामने हैं। ईरान के नेताओं ने भी इस मौके पर अमेरिका का मजाक उड़ाया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बागर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका अब अपने पायलट को खोजने में लगा है।

    आगे की चुनौती

    अमेरिका ने बचाव अभियान को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन बताया गया है कि विशेष बल, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मदद से पायलट को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। समय इस मिशन में सबसे अहम है, क्योंकि अगर पायलट पकड़ा गया तो इसका इस्तेमाल प्रचार के लिए किया जा सकता है।

    इस बीच, युद्ध में अमेरिकी विमानों के लगातार नुकसान से यह भी साफ हो रहा है कि ईरान की रक्षा प्रणाली उम्मीद से ज्यादा मजबूत साबित हो रही है। इससे अमेरिका की सैन्य ताकत की छवि को भी झटका लग सकता है।

    ट्रंप के लिए यह मिशन सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि उनकी विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है। अगर पायलट सुरक्षित वापस आता है तो उनकी छवि मजबूत होगी, लेकिन असफलता की स्थिति में विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल सकता है।

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